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भारत के इस शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अन्य शहरों से सस्ती

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में वृद्धि हुई है, लेकिन पोर्ट ब्लेयर में ये कीमतें अन्य बड़े शहरों की तुलना में 10 से 15 रुपये सस्ती हैं। इस लेख में जानें कि कैसे कम टैक्स और वैट ने पोर्ट ब्लेयर को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराया है। इसके अलावा, महंगे ईंधन का आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है, इस पर भी चर्चा की गई है।
 

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर वृद्धि हुई है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम में 33 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस निर्णय के बाद, दिल्ली, मुंबई, जयपुर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें लोगों के लिए बोझिल हो गई हैं। हालांकि, भारत में एक ऐसा शहर भी है, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें अन्य बड़े शहरों की तुलना में 10 से 15 रुपये तक कम हैं.


सस्ती कीमतें पोर्ट ब्लेयर में

भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल और डीजल केंद्र शासित प्रदेश पोर्ट ब्लेयर में उपलब्ध है। अंडमान और निकोबार की राजधानी होने के बावजूद, यहां तेल की कीमतें देश के कई बड़े शहरों की तुलना में काफी कम हैं। इसका मुख्य कारण कम वैट और स्थानीय टैक्स हैं। जबकि कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर भारी टैक्स लगाया जाता है, वहीं पोर्ट ब्लेयर में टैक्स दरें काफी कम हैं.


कीमतों में अंतर

मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में जहां पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर जा चुकी है, वहीं पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल की कीमत 84.99 रुपये है। इसी प्रकार, डीजल की कीमत भी यहां 80.64 रुपये है, जो अन्य शहरों की तुलना में 10 से 15 रुपये तक सस्ती है.


पेट्रोल-डीजल के दामों में भिन्नता

देश में पेट्रोल और डीजल की बेस कीमत लगभग समान होती है, लेकिन विभिन्न राज्यों के टैक्स, वैट और परिवहन खर्च के कारण अंतिम कीमत में भिन्नता आती है। कुछ राज्यों में अधिक टैक्स होने के कारण ईंधन महंगा हो जाता है, जबकि जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में टैक्स कम है, वहां लोगों को राहत मिलती है.


महंगे ईंधन का प्रभाव

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहन चालकों पर नहीं पड़ता। परिवहन खर्च में वृद्धि से खाद्य पदार्थों, सब्जियों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है.