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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में पीएसएलवी की लगातार असफलताएं: क्या हैं कारण?

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में हाल ही में पीएसएलवी रॉकेट की लगातार असफलताएँ सामने आई हैं, जिससे तकनीकी पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठने लगे हैं। 18 मई 2025 को पीएसएलवी-सी61 और 12 जनवरी को पीएसएलवी-सी62 मिशन में समस्याएँ आईं, जिससे रॉकेट की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन असफलताओं के पीछे संभावित तकनीकी खामियाँ हो सकती हैं। जानें इसरो की जांच रिपोर्ट और भविष्य की चुनौतियों के बारे में।
 

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की चुनौतियाँ

हाल के महीनों में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पीएसएलवी रॉकेट, जिसे विश्वसनीय माना जाता है, लगातार दूसरी बार अपने मिशन में पूरी सफलता नहीं प्राप्त कर सका है। इससे तकनीकी पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठने लगे हैं।


पीएसएलवी-सी61 और सी62 मिशन की असफलताएँ

18 मई 2025 को पीएसएलवी-सी61 मिशन असफल रहा, जो इस रॉकेट के लिए एक दुर्लभ झटका था। इसके लगभग आठ महीने बाद, 12 जनवरी को श्रीहरिकोटा से सुबह 10:17 बजे लॉन्च किया गया पीएसएलवी-सी62 मिशन भी विफल रहा। उड़ान के 50 मिनट बाद, इसरो के प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट के तीसरे चरण में असामान्यता पाई गई है, और इसके प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।


पीएसएलवी की तकनीकी विशेषताएँ

पीएसएलवी एक चार चरणों वाला रॉकेट है, जिसमें सी61 मिशन के लिए एक्सएल संस्करण का उपयोग किया गया था। इस मिशन का मुख्य पेलोड ईओएस-09 उपग्रह था, जिसे पृथ्वी की निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया था। रॉकेट को 529 किलोमीटर की सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में उपग्रह स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में ईंधन दाब में गिरावट के कारण मिशन को रोकना पड़ा।


जांच और संभावित कारण

विफलता विश्लेषण समिति ने संकेत दिया है कि समस्या पीएस3 ठोस ईंधन मोटर प्रणाली में हो सकती है। नोज़ल या केसिंग में संरचनात्मक खामी के कारण दाब नियंत्रित नहीं रह सका। हालांकि, समिति की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि इसे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपा गया है।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट को गोपनीय रखने के पीछे व्यावसायिक कारण हो सकते हैं। इसरो पीएसएलवी को एक व्यावसायिक लॉन्च वाहन के रूप में बढ़ावा दे रहा है, और विफलता का खुलासा बीमा लागत और बाजार की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।


भविष्य की चुनौतियाँ

इसरो प्रमुख ने बताया कि पीएसएलवी-सी62 मिशन में तीसरे चरण में रोल रेट डिस्टर्बेंस देखा गया, जिससे रॉकेट की उड़ान दिशा प्रभावित हुई। यह चिंता का विषय है कि एक बड़े असफल मिशन के आठ महीने बाद अगला प्रक्षेपण बिना पूरी पारदर्शिता के किया गया है, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है।