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भारत की साइबर अपराध केंद्र की सफलता: कंबोडिया में 81 भारतीयों को बचाया गया

भारत के विशेष साइबर अपराध केंद्र ने कंबोडिया में एक स्कैम कंपाउंड से 81 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला। एफएटीएफ की रिपोर्ट में इस कार्रवाई का जिक्र किया गया है, जिसमें बताया गया है कि कैसे ओपन सोर्स ऑपरेशन्स का उपयोग कर इस धोखाधड़ी नेटवर्क का पता लगाया गया। रिपोर्ट में दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ते स्कैम मॉडल और इसके आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला गया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और भारत की साइबर सुरक्षा की पहल के बारे में।
 

भारत की साइबर अपराध केंद्र की कार्रवाई


नई दिल्ली। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के विशेष साइबर अपराध केंद्र ने ओपन सोर्स ऑपरेशन्स का उपयोग करते हुए कंबोडिया में एक धोखाधड़ी केंद्र की सटीक भौगोलिक स्थिति का पता लगाया। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप, 81 भारतीय नागरिकों को मानव तस्करी के चंगुल से सुरक्षित निकाला गया। एफएटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में स्थित स्कैम कंपाउंड्स से जुड़े अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के बाद से इस स्कैम मॉडल में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे अरबों अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो रहा है।


कंबोडिया में भारतीय नागरिकों का मामला

रिपोर्ट में कंबोडिया के स्वाय रिएंग प्रांत के बावेत शहर में फंसे भारतीय नागरिकों का एक विशेष मामला साझा किया गया है। 2025 के उत्तरार्ध में, बावेत के एक स्कैम कंपाउंड से भेजे गए एसओएस संदेश ने नोम पेन्ह स्थित भारतीय दूतावास का ध्यान आकर्षित किया। दूतावास ने तुरंत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) को सूचित किया और ओपन सोर्स डेटा के माध्यम से स्थान की सटीक ट्रैकिंग करने का अनुरोध किया। इसके बाद, कंबोडियाई अधिकारियों के साथ मिलकर एक दो दिवसीय अभियान चलाया गया, जिसमें सभी 81 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया।


साइबर धोखाधड़ी के शिकार भारतीय नागरिक

सरकार ने पहले ही संसद में बताया था कि 2022 से 2025 के बीच कंबोडिया, म्यांमार और लाओस के स्कैम सेंटर्स से कुल 6,998 भारतीयों को रेस्क्यू किया गया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि फर्जी भर्ती एजेंटों और अवैध तरीकों से भारतीयों को आकर्षक आईटी नौकरियों का झांसा देकर इन देशों में भेजा जाता है।


2023 से 2024 के बीच कंबोडिया, लाओस और म्यांमार से वापस लाए गए 15 भारतीय नागरिकों की जांच से पता चला है कि पीड़ितों को मुख्य रूप से थाईलैंड के रास्ते ले जाया जाता था और उनसे जबरन साइबर अपराध करवाए जाते थे। भर्ती के लिए इनसे 50,000 से 70,000 रुपये तक का शुल्क लिया जाता था, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते थे।


आई4सी नेटवर्क की कार्यप्रणाली

एफएटीएफ की रिपोर्ट में भारत के आई4सी नेटवर्क की कार्यप्रणाली की सराहना की गई है, जो पीड़ितों की रिपोर्टिंग, वित्तीय हस्तक्षेप, बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने और अंतर-राज्यीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय को एक मंच पर लाता है। यह प्रणाली रियल-टाइम में पैसों के लेन-देन का पता लगाने और धोखेबाजों की संपत्तियों तथा खातों को तुरंत फ्रीज करने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है।