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भारत की वैश्विक दक्षिण के हितों की वकालत: प्रधानमंत्री मोदी का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वैश्विक दक्षिण के हितों की वकालत करते हुए भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान किए गए प्रयासों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके नवाचारों का लाभ सभी राष्ट्रमंडल देशों को मिले। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता और जन कल्याण की भावना पर भी जोर दिया, जिसमें 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की उपलब्धि शामिल है।
 

प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक दक्षिण के प्रति समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत वैश्विक मंचों पर वैश्विक दक्षिण के हितों की मजबूती से रक्षा कर रहा है। उन्होंने संसद भवन में राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) में अपने संबोधन के दौरान इस क्षेत्र की चिंताओं को प्राथमिकता देने के अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने जी20 की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक दक्षिण के एजेंडे को आगे बढ़ाने में भारत के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उसके नवाचारों का लाभ पूरे वैश्विक दक्षिण और राष्ट्रमंडल देशों को मिले। इसके साथ ही, भारत सहयोगी देशों के लिए ओपन-सोर्स तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने का भी प्रयास कर रहा है, ताकि वे भारत में लागू की जा रही प्रणालियों के समान प्रणालियाँ स्थापित कर सकें।


भारत का समावेशी लोकतंत्र

प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता पर जोर देते हुए कहा कि इसकी पहचान अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता से होती है। उन्होंने बताया कि जन कल्याण की भावना से प्रेरित होकर, भारत समावेशी रूप से कार्य कर रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी पीछे न छूटे। इसी प्रतिबद्धता के चलते, भारत ने हाल के वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र वास्तव में परिणाम देता है और इसका अर्थ है अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाना। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हम बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।