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भारत की प्रजनन दर में गिरावट: सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और राज्यवार आंकड़े

भारत की कुल प्रजनन दर में हालिया गिरावट ने देश की जनसंख्या संरचना पर गहरा प्रभाव डाला है। एसआरएस की रिपोर्ट के अनुसार, यह दर 2.1 से घटकर 1.9 हो गई है, जो विभिन्न राज्यों में भिन्नता दर्शाती है। बिहार, उत्तर प्रदेश, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में उच्च प्रजनन दर बनी हुई है, जबकि दिल्ली में यह दर सबसे कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट दीर्घकालिक विकास नीतियों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। जानें इस विषय पर और क्या कहा जा रहा है और भविष्य में क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
 

कुल प्रजनन दर में बदलाव

Total Fertility Rate: भारत की जनसंख्या संबंधी स्थिति में हालिया रिपोर्ट ने एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। एसआरएस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल प्रजनन दर 2.1 से घटकर 1.9 हो गई है।


जन्म दर के मामले में देश के ये 6 राज्य हैं सबसे आगे, दिल्ली की रैंक जानकर हो जाएंगे हैरान


ये आंकड़े केवल संख्याओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे, श्रम शक्ति और दीर्घकालिक विकास नीतियों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। सरल शब्दों में, जहां महिलाएं औसतन 2.5 बच्चे पैदा करती हैं, वहां जनसंख्या बढ़ती है, जबकि 1.9 की दर वाले स्थानों पर जनसंख्या में कमी आती है।


प्रजनन दर में शीर्ष राज्य

ये 6 राज्य हैं सबसे आगे



  • बिहार

  • उत्तर प्रदेश

  • मध्य प्रदेश

  • राजस्थान

  • छत्तीसगढ़

  • झारखंड


विशेषज्ञों की राय

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?


हाल के वर्षों में यह धारणा बनी थी कि प्रजनन दर में गिरावट स्थिर हो गई है। 2020-22 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में टीएफआर लगभग 2.2 और शहरी क्षेत्रों में 1.6 के आसपास रही। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब प्रतिस्थापन स्तर के करीब स्थिर हो गया है, लेकिन 2024 के आंकड़ों ने दिखाया कि यह स्थिरता केवल अस्थायी थी और गिरावट का सिलसिला जारी है।


दिल्ली की प्रजनन दर

दिल्ली में सबसे कम बच्चे होते हैं पैदा


दिल्ली में प्रजनन दर लगभग 1.2 है। इसके बाद केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में यह दर 1.3 है। जब टीएफआर 2.1 होती है, तो इसे प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है। उदाहरण के लिए, बिहार में महिलाओं की प्रजनन दर अभी भी अधिक है, जबकि कई शहरी क्षेत्रों में यह संख्या कम है। राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म दर ऊंची बनी हुई है, जिससे टीएफआर लगभग 2.3 है, जबकि शहरी परिवारों में यह तेजी से घट रही है।


जनसंख्या में कमी का खतरा

जनसंख्या की कमी का खतरा


जब प्रजनन दर लंबे समय तक गिरती है, तो जनसंख्या वृद्धि धीमी हो जाती है और नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। पिछले दशक में बिहार में प्रजनन दर में सबसे कम कमी आई है, जो 2012-14 में 3.2 थी और 2022-24 में घटकर 2.9 हो गई है।


अन्य राज्यों की स्थिति

क्या है अन्य राज्यों का हाल?


उच्च प्रजनन दर वाले राज्यों में असम और छत्तीसगढ़ शामिल हैं, जहां क्रमशः 11.5% और 13% की गिरावट देखी गई है। दिल्ली और तमिलनाडु में प्रजनन दर 1.7 है, जो लगभग 29.4% और 23.5% की गिरावट के बाद है।


कामकाजी वर्ग की वृद्धि

बढ़ रही वर्किंग क्लास की आबादी


यह ध्यान देने योग्य है कि भारत की कामकाजी उम्र (15-59 वर्ष) की आबादी उन राज्यों में बढ़ी है जहां प्रजनन दर कम है। इसका अर्थ है कि भारत के लिए जनसंख्यात्मक विकास का अवसर अभी समाप्त नहीं हुआ है। भारत में लगभग 66.4% जनसंख्या 15-60 वर्ष के बीच है, जबकि 0-14 वर्ष की आयु वर्ग की जनसंख्या 24% है और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की जनसंख्या 10% से कम है।


भविष्य की संभावनाएं

क्या किया जा सकता है


यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में निवेश समय पर बढ़ाया जाए, तो कम प्रजनन दर को विकास के लिए लाभकारी बनाया जा सकता है। इसके विपरीत, तेजी से घटती प्रजनन दर भविष्य में आर्थिक दबाव और श्रम बाजार में समस्याएं पैदा कर सकती है।