भारत की पहली बुलेट ट्रेन: अहमदाबाद से मुंबई के बीच 2027 में शुरू होगी सेवा
बुलेट ट्रेन परियोजना का अद्यतन
भारत की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन को अगस्त 2027 से चलाने की योजना बनाई जा रही है। इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य चल रहा है। अहमदाबाद से मुंबई के बीच यह ट्रेन 508 किलोमीटर की दूरी को केवल 2 घंटे 50 मिनट में तय करेगी। इस मार्ग पर 21 किलोमीटर की दूरी भूमिगत होगी, जिसमें से कुछ हिस्सा समुद्र के नीचे से गुजरेगा। पानी की गहराई में 213 फीट की गहराई पर 250 किमी/घंटा की गति से ट्रेन चलाना एक चुनौती है, जिसके लिए विशेष टनल का निर्माण किया जा रहा है। चीन से आई 'महामशीन' इस कार्य को और तेज करने में मदद करेगी.
चीन से आई महामशीन
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) के लिए समुद्र के नीचे टनल का निर्माण किया जाना है। इस पूरे रूट का 21 किलोमीटर हिस्सा जमीन और पानी के नीचे है। पानी के बोरिंग कार्य के लिए चीन से विशेष मशीन मंगवाई गई है। यह टनल बोरिंग मशीन (TBM) मुंबई पोर्ट पर पहुंच चुकी है, जिसे जर्मनी की एक कंपनी ने चीन में तैयार किया है.
महामशीन की विशेषताएँ
13.65 मीटर व्यास वाली यह टनल बोरिंग मशीन भारत में किसी रेल प्रोजेक्ट में पहली बार उपयोग की जा रही है। मेट्रो टनल में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का व्यास 5 से 6 मीटर होता है, जिससे इसके आकार का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह मशीन टुकड़ों में आई है और इसे असेंबल करने में कम से कम 90 दिनों का समय लगेगा। इसे साइट तक पहुंचाने के लिए 150 से अधिक ट्रेलरों की आवश्यकता होगी.
समुद्र के नीचे टनल का निर्माण
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के एमडी अचल खरे के अनुसार, समुद्र के नीचे 7 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण आसान होगा। यह टनल ठाणे क्रीक के नीचे बनाई जाएगी, जिसकी गहराई समुद्र तल से 25 से 65 मीटर (82 से 213 फीट) होगी.
महामशीन की कार्यक्षमता
यह टीबीएम मशीन कम कंपन और आवाज के साथ तेजी से खुदाई कर सकती है। इसके अलावा, यह मलबा हटाने और टनल को कंक्रीट से मजबूत करने का कार्य भी करेगी.
बुलेट ट्रेन की सेवा कब शुरू होगी?
रेल मंत्रालय के अनुसार, भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 तक चलने की उम्मीद है। पहले चरण में यह ट्रेन गुजरात के सूरत से बिलिमोरा सेक्शन के बीच चलेगी.
बुलेट ट्रेन परियोजना का खर्च
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च पहले 1.1 लाख करोड़ रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.