भारत की पवन ऊर्जा में तेजी से हो रहा विस्तार: केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी
भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में वृद्धि
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर अपने भाषण में बताया कि भारत पवन ऊर्जा उत्पादन में तेजी से प्रगति कर रहा है और अब यह क्षेत्र में विश्व के चार प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (WIPPA) के 13वें स्थापना दिवस पर उन्होंने कहा कि यह संगठन ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आवाज बनकर उभरा है।
क्षेत्रीय विकास और भविष्य की योजनाएं
जोशी ने बताया कि 2023-24 में भारत ने 6.1 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। वर्तमान में, भारत के पास 46.1 गीगावाट से अधिक स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता है, और 28 गीगावाट की क्षमता पर कार्य जारी है। उन्होंने पिछले वर्ष की तुलना में 6 गीगावाट से 10 गीगावाट की वृद्धि की जानकारी दी।
भारत की पवन ऊर्जा क्षमता का उपयोग
जोशी ने यह भी कहा कि भारत की पवन ऊर्जा क्षमता का अभी भी बहुत कम उपयोग हो रहा है। 150 मीटर की ऊंचाई पर, भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 1,164 गीगावाट है। यदि हम इसका केवल 25 प्रतिशत भी उपयोग करें, तो विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उल्लेख किया।
पवन ऊर्जा का महत्व
जोशी ने कहा कि पवन ऊर्जा की उपलब्धता चौबीसों घंटे इसे महत्वपूर्ण बनाती है। जबकि सौर ऊर्जा केवल दिन के समय तक सीमित है, पवन ऊर्जा शाम और रात में अधिक प्रभावी होती है। पवन ऊर्जा उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत चरम मांग के समय होता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में पवन, सौर और भंडारण को मिलाकर एकीकृत हाइब्रिड प्रणालियों का विकास होगा।