भारत की पदक उम्मीदें: कॉमनवेल्थ गेम्स 2023 की तैयारी
कॉमनवेल्थ गेम्स 2023 का आयोजन ग्लासगो में हो रहा है, जहां भारत के 125 एथलीट पदक जीतने के लक्ष्य के साथ पहुंचे हैं। इस बार खेलों में केवल 10 खेल शामिल हैं, जिससे भारत की पदक संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। जानें कौन से प्रमुख खिलाड़ी भारत की उम्मीदों को बढ़ा रहे हैं और किन खेलों के हटने से चुनौती बढ़ी है।
Jul 24, 2026, 19:06 IST
कॉमनवेल्थ गेम्स का आगाज़
फुटबॉल के फीफा विश्व कप के बाद अब खेल प्रेमियों का ध्यान राष्ट्रमंडल खेलों की ओर है, जो 23 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित होने जा रहे हैं। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में भारतीय एथलीटों का दल तिरंगा लहराने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बार भारत की ओर से कुल 125 खिलाड़ी, जिनमें 77 पुरुष और 48 महिलाएं शामिल हैं, पदक जीतने के लक्ष्य के साथ पहुंचे हैं। भारत ने हमेशा से कॉमनवेल्थ गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, और इस बार भी उम्मीदें ऊंची हैं। पिछले बर्मिंघम 2022 खेलों में भारत ने 61 पदक जीते थे, जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल थे। अब तक भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 564 पदक जीते हैं, जिसमें 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य पदक शामिल हैं। भारतीय एथलीट इस बार भी नए रिकॉर्ड बनाने के इरादे से मैदान में उतर रहे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वरूप
सीमित खेलों वाले कॉमनवेल्थ गेम्स
ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल 10 खेल शामिल हैं, जबकि पिछले बर्मिंघम गेम्स में 19 खेल थे। इस बार के खेलों में एथलेटिक्स, तैराकी, ट्रैक साइक्लिंग, वेटलिफ्टिंग, 3x3 बास्केटबॉल, लॉन बॉल्स, नेटबॉल, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स, जूडो और बॉक्सिंग शामिल हैं। जिन खेलों को इस बार शामिल नहीं किया गया है, उनमें बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, स्क्वैश, टेबल टेनिस, ट्रायथलॉन, रेसलिंग, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन्स शामिल हैं।
आर्थिक कारणों से बदलाव
लेकिन ऐसा क्यों?
इसका मुख्य कारण आर्थिक है। प्रारंभ में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में आयोजित होने वाले थे, लेकिन बढ़ती लागत के कारण विक्टोरिया ने मेज़बानी से हाथ खींच लिए। इसके बाद ग्लासगो ने हस्तक्षेप किया, लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास पूर्ण आयोजन के लिए पर्याप्त समय नहीं है, इसलिए उन्होंने एक संक्षिप्त संस्करण प्रस्तावित किया। इसके अलावा, खेलों का आयोजन चार स्थानों पर किया जाएगा, जो सभी सेंट्रल ग्लासगो में 12 किलोमीटर के दायरे में होंगे।
भारत की पदक संभावनाएं
भारत के पदक जीतने की संभावनाओं पर असर
ग्लासगो खेलों के सीमित स्वरूप के कारण भारत के पदक जीतने की संभावनाएं कम हो गई हैं। उदाहरण के लिए, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेलों को हटाने से भारत को नुकसान होगा, क्योंकि पिछले संस्करण में इन खेलों से कई पदक मिले थे। भारत के पूर्व हॉकी कप्तान विरेन रासकिन्हा ने कहा कि इन खेलों के हटने से एक बड़ा खालीपन आ जाएगा, जिससे पदक तालिका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ध्यान केंद्रित करने वाले खिलाड़ी
इन भारतीय खिलाड़ियों पर रहेंगी सबसे ज्यादा नजर
नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा मुक्केबाजी), गुरिंदरवीर सिंह (100 मीटर दौड़) और प्रणति नायक (आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स) जैसे खिलाड़ी भारत की पदक उम्मीदों को बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, युवा खिलाड़ियों जैसे सर्वेश कुशारे और ज्ञानेश्वरी यादव पर भी नजरें रहेंगी।