भारत की ऊर्जा सुरक्षा: विविधता और स्थिरता पर जोर
भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता
भारत ने आज स्पष्ट किया कि 1.4 अरब नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इसी आधार पर वह पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यह टिप्पणी की, जब अमेरिका ने कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदने पर रोक लगाने पर सहमति जताई है। जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा खरीद के संदर्भ में, सरकार ने कई बार कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारी ऊर्जा खरीद में विविधता लाना, बाजार की स्थितियों और अंतरराष्ट्रीय परिवर्तनों के अनुसार, हमारी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के सभी निर्णय इसी दृष्टिकोण से लिए जाते हैं और भविष्य में भी यही नीति अपनाई जाएगी।"
ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण
जायसवाल ने यह भी बताया कि ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण भारत की स्थायी नीति है। इसका मतलब है कि भारत एक ही देश पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि कई विकल्पों को खुला रखता है ताकि आपूर्ति, कीमत और रणनीतिक संतुलन बना रहे। यह बयान उन अटकलों को खारिज करता है जो यह सुझाव देती थीं कि भारत किसी एक खेमे की ओर झुक रहा है।
वेनेजुएला के साथ संबंध
वेनेजुएला के संबंध में, प्रवक्ता ने बताया कि यह देश लंबे समय से भारत का ऊर्जा साझेदार रहा है। 2019 तक वहां से तेल की आपूर्ति होती रही, लेकिन प्रतिबंधों के कारण इसे रोकना पड़ा। 2023 और 2024 के बीच कुछ समय के लिए खरीद फिर से शुरू हुई, लेकिन दोबारा प्रतिबंध लगने से इसे रोकना पड़ा। इसके बावजूद, भारत ने अपने दरवाजे बंद नहीं किए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय उपक्रम वहां काम कर रही अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ साझेदारी बनाए हुए हैं, और यदि वाणिज्यिक लाभ दिखा तो भविष्य में आपूर्ति पर विचार किया जाएगा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
जायसवाल ने भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते के संबंध में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच फोन वार्ता के बाद अमेरिका ने परस्पर शुल्क में कमी के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अब भारत में निर्मित उत्पाद अमेरिका को 18 प्रतिशत शुल्क पर भेजे जा सकेंगे, जिसे उन्होंने भारतीय निर्यात के लिए एक बड़ा अवसर बताया।
ईरान में भारतीय नाविकों की स्थिति
जायसवाल ने यह भी बताया कि ईरान में पकड़े गए 16 भारतीय नाविकों को वाणिज्य दूतावास की पहुंच मिल चुकी है। भारतीय अधिकारियों ने बंदर अब्बास में उनसे मुलाकात की है। ईरानी पक्ष के अनुसार, आठ नाविकों को रिहा कर दिया गया है और वे घर लौटेंगे। बाकी आठ के मामले में लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है और हर संभव सहायता दी जाएगी।
भारत की नीति और दृष्टिकोण
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रियाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत वैश्विक मंच पर अपने हितों को स्पष्ट रूप से रखता है। चाहे वह तेल की खरीद हो, व्यापार समझौता हो या विदेश में फंसे नागरिकों की सुरक्षा, हर मामले में निर्णय का केंद्र भारत का अपना हित है। नई दिल्ली ने यह स्पष्ट किया है कि भारत की नीति बाहरी दावों से प्रभावित नहीं होती। भारत सभी की सुनता है, लेकिन अपने हितों के अनुसार निर्णय लेता है।