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भारत की आर्थिक वृद्धि पर युद्ध का प्रभाव: मूडीज की चेतावनी

मूडीज ने हाल ही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर को घटाकर 6% कर दिया है, जो कि पहले 6.8% थी। इस बदलाव का मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध है, जो महंगाई को बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती तेल कीमतों और गैस की आपूर्ति में कमी से भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, महंगाई के कारण सस्ते होम लोन का सपना भी टूट सकता है। जानें इस रिपोर्ट के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 

भारत की आर्थिक स्थिति पर मूडीज की रिपोर्ट


हालांकि युद्ध भारत से 4000 किमी दूर चल रहा है, लेकिन इसका प्रभाव यहाँ भी महसूस किया जा रहा है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण भारत में गैस और पेट्रोल-डीजल की समस्या के साथ-साथ एक और गंभीर संकट सामने आ रहा है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि की दर को 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है।

महंगाई में वृद्धि की आशंका
मूडीज की रिपोर्ट ने भारत को एक बड़ा झटका दिया है। गैस सिलेंडर की आपूर्ति में कमी और तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारत की विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बढ़ती तेल कीमतों के कारण महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा। भारत, मध्य पूर्व से भारी मात्रा में तेल और गैस का आयात करता है, जहाँ युद्ध की स्थिति बनी हुई है।

युद्ध का आर्थिक प्रभाव
मूडीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत के बजाय 6 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसका मुख्य कारण ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध है। इस संघर्ष के कारण महंगाई में वृद्धि से उपभोक्ता खर्च में कमी और औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती आ रही है। आयात की बढ़ती लागत के कारण कंपनियाँ निवेश में कमी कर रही हैं। मूडीज ने महंगाई की भविष्यवाणी करते हुए इसे पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले दोगुना करने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का महंगाई दर 2.4 प्रतिशत था, जिसे वर्तमान वित्त वर्ष के लिए 4.8 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना जताई गई है।

सस्ते होम लोन का सपना टूट सकता है
यह महंगाई न केवल दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को प्रभावित करेगी, बल्कि सस्ते होम लोन के सपनों को भी चकनाचूर कर देगी। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नीतिगत दरों में कमी का निर्णय ले सकता है। यदि रेपो दर बढ़ाई गई, तो कर्ज और होम लोन, कार लोन की ईएमआई में वृद्धि होगी। युद्ध के कारण एनआरआई और विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस में भी कमी आएगी। कुल मिलाकर, यह संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालने वाला है.