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भारत की अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई और वित्तीय प्रवाह पर खतरे बढ़ गए हैं। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में घरेलू मांग और नीतिगत समर्थन के बावजूद, ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में अनिश्चितता का जिक्र किया गया है। 'अल नीनो' के प्रभाव से मानसून में कमी की आशंका है, जो महंगाई को और बढ़ा सकती है। सरकार ने कृषि में लागत दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जानिए इस संकट का भारत की आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है।
 

महंगाई और आर्थिक जोखिम

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर नुकसान पहुँचाया है, जिससे महंगाई, व्यापार और वित्तीय प्रवाह पर खतरे बढ़ गए हैं। हालांकि, भारत की मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत समर्थन, और सार्वजनिक निवेश से अर्थव्यवस्था को कुछ सुरक्षा मिली है। वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। अप्रैल की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में अनिश्चितता देश की आर्थिक स्थिरता को चुनौती दे सकती है। इसके अलावा, 'अल नीनो' के प्रभाव से इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना है, जिससे कई जिलों में औसत से कम वर्षा होने की आशंका है।


महंगाई के बढ़ने का खतरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परिस्थितियों में महंगाई, राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा है, जिससे आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ सकता है। भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रहा था, लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव ने इस अनुमान को प्रभावित किया है।


सरकार की चेतावनी

रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में झटके की चेतावनी दी गई है। बढ़ती कीमतों और धीमी आर्थिक गतिविधियों के कारण मांग में कमी भी चिंता का विषय है। कंपनियों द्वारा बढ़ती लागत को उपभोक्ताओं पर डालने से महंगाई में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर कच्चे माल से तैयार उत्पाद बनाने वाले उद्योगों पर पड़ेगा।


सरकार के उठाए गए कदम

महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कृषि में लागत दबाव को कम करने के लिए सरकार ने उर्वरक उत्पादन के लिए गैस आवंटन बढ़ाने, सीमा शुल्क में छूट और खरीफ सत्र के लिए सब्सिडी में वृद्धि जैसे कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है, जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अधिक पड़ा है।


कैश की स्थिति

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। यदि कमजोर मानसून भी जुड़ता है, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली के प्रमुख संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जिससे वित्तीय स्थिरता पर बड़ा खतरा नहीं है।


एफटीए से निर्यात में वृद्धि

हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी को मजबूत किया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता भारत के लिए अवसर भी बन सकती है, जिससे भारत विनिर्माण, सेवाओं और बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है।