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भारत की अर्थव्यवस्था 2047 तक 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना

भारत की अर्थव्यवस्था 2047 तक 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जो युवा जनसंख्या, डिजिटल क्षमताओं और मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि भारत 6% की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखता है, तो प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 15,000 डॉलर तक पहुंच सकती है। जानें इस वृद्धि के पीछे के प्रमुख कारक जैसे मैन्युफैक्चरिंग में अवसर, कार्यरत महिलाओं की संख्या में वृद्धि, और डिजिटल भुगतान में तेजी।
 

भारत की आर्थिक संभावनाएं

नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026: भारत की युवा जनसंख्या, डिजिटल क्षमताएं, एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, मैन्युफैक्चरिंग और हरित ऊर्जा क्षेत्र की मजबूती के चलते, देश की अर्थव्यवस्था 2047 तक 26 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 2,314 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। वर्तमान में, भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग 4.18 ट्रिलियन डॉलर की है। यह अनुमान रेटिंग एजेंसी अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की हालिया रिपोर्ट 'India@100: Realizing the potential of a USD 26 trillion economy' में प्रस्तुत किया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत औसतन 6 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि दर बनाए रखता है, तो 2047-48 तक जीडीपी 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। इससे प्रति व्यक्ति आय वर्तमान स्तर से लगभग छह गुना बढ़कर 15,000 डॉलर (लगभग 13.5 लाख रुपये) से अधिक हो जाएगी। EY का मानना है कि भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।


7 प्रमुख कारक जो उम्मीद बढ़ा रहे हैं


1. बड़ी कामकाजी जनसंख्या: 2030 तक भारत की 68.9% जनसंख्या कामकाजी उम्र (15-64 वर्ष) की होगी। तब देश में 1.04 अरब यानी लगभग 100 करोड़ लोग कार्यरत होंगे। अगले दशक में दुनिया में जुड़ने वाले 24-25% नए श्रमिक यहीं से होंगे। औसत उम्र 28.4 वर्ष है।


2. मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: भारत में 107 यूनिकॉर्न हैं, जो पिछले 4 वर्षों में 66% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़े हैं। इनकी कुल वैल्यू 7.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। निवेशकों ने लगभग 3.82 लाख करोड़ रुपये का लाभ कमाया है। भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में आगे भी अच्छी संभावनाएं हैं।


3. मैन्युफैक्चरिंग में अवसर: पीएलआई योजना के तहत 14 क्षेत्रों में ₹2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इससे मैन्युफैक्चरिंग में उन 43% लोगों को नए रोजगार मिल सकते हैं, जो अभी कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं। इससे बुनियादी ढांचे में भी निवेश बढ़ेगा।


4. कार्यरत महिलाओं की संख्या में वृद्धि: भारत की उच्च शिक्षा में लगभग 49% छात्राएं हैं। इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में भारत के कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ने वाली है। इससे देश की उत्पादकता में वृद्धि की संभावना है।


5. डिजिटल भुगतान में तेजी: यूपीआई नेटवर्क से 350 से अधिक बैंक जुड़े हुए हैं, जिनके 26 करोड़ से अधिक यूनिक यूजर हैं। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने 2014-2019 के बीच 15.6% की दर से वृद्धि की, जो देश की कुल अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से 2.4 गुना तेज थी।


6. अधिक कर्ज की गुंजाइश: विश्व बैंक के अनुसार, 2020 में भारत में निजी कंपनियों को दिया गया कुल कर्ज, देश की जीडीपी का केवल 55% था, जो दुनिया के औसत 148% से काफी कम है। इसका मतलब है कि कंपनियां अभी और कर्ज लेने में सक्षम हैं।


7. क्लीन एनर्जी और टिकाऊ विकास: भारत ने 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसका अर्थ है कि इसके बाद भारत फॉसिल फ्यूल जैसे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता समाप्त कर देगा। यह एक बड़ा अवसर है।


इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सरकार को 2030 तक जीडीपी के मुकाबले कार्बन के मौजूदा उपयोग में 45% की कमी लानी होगी। सरकार ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर दे रही है। केवल ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए केंद्र से 14.5 अरब डॉलर का समर्थन है। 2030 तक कुल 10 करोड़ लोग ईवी में शिफ्ट हो सकते हैं।