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भारत और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की नई चुनौतियाँ

भारत और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की नई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। रूस की प्रमुख ऑयल रिफाइनरी पर यूक्रेन के ड्रोन हमले ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ईरान ने अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए चीन को तेल भेजना शुरू कर दिया है। इस बीच, अमेरिका की चिंता बढ़ रही है, खासकर ईरान की उन्नत मिसाइल तकनीक को लेकर। क्या यह स्थिति वैश्विक स्तर पर तनाव को बढ़ाएगी? जानें पूरी कहानी में।
 

भारत का पुराना मित्र रूस और वर्तमान संकट

राजनीति और कूटनीति के क्षेत्र में एक पुरानी कहावत है कि पुराने दोस्त हमेशा सबसे अच्छे होते हैं। रूस भारत के लिए वही पुराना और विश्वसनीय मित्र है, जिसने हर कठिनाई में भारत का साथ दिया है। लेकिन 2 मई को जब दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर थीं, तब रूस से एक चिंताजनक खबर आई। यूक्रेन के ड्रोन ने रूस की एक प्रमुख ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया है। यह यूक्रेन का चौथा हमला है, और इसके पीछे की रणनीति वाशिंगटन की मानी जा रही है। इस स्थिति में सवाल उठता है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर रूस की तेल उद्योग को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। पुतिन और ट्रंप के बीच 90 मिनट की बातचीत में तनाव स्पष्ट था, जिसके बाद रूस के 10 बड़े तेल ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया। अमेरिका को यह याद रखना चाहिए कि यदि रूस का तेल जलता है, तो उसकी गर्मी पूरी दुनिया को प्रभावित करेगी, और भारत का मित्र रूस अकेला नहीं है।


ईरान की रणनीति और अमेरिका की चिंता

होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका के 19 युद्धपोत तैनात हैं, जो ईरान के रास्ते को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन ईरान ने अब निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के इस ब्लॉकेट को तोड़ने के लिए एक गुप्त रणनीति तैयार की है, जिसमें रूस के युद्ध विशेषज्ञ और चीन के जासूस शामिल हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि यह घेराबंदी समाप्त नहीं होती है, तो अमेरिका के ये 19 जहाज समुद्र की गहराई में समा जाएंगे। अमेरिका अब चिंतित है, और इसका कारण ईरान की उन्नत मिसाइल तकनीक है। हाल ही में व्हाइट हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक में, सेंट कॉम के प्रमुख ब्रैट कूपर ने ट्रंप को बताया कि ईरान की मिसाइलें साधारण नहीं हैं। ये एमआईआरवी तकनीक से लैस हैं, जो एक ही मिसाइल को कई लक्ष्यों पर निशाना बनाने की क्षमता देती हैं।


अमेरिका की नई मिसाइल तकनीक की मांग

इसी कारण अमेरिका अब डार्क ईगल जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों की मांग कर रहा है, जिनकी गति 6000 किमी/घंटा से अधिक है। इस युद्ध का प्रभाव अब पड़ोसी देशों पर भी दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान में तेल की भारी कमी हो गई है। इस बीच, ईरान ने एक मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए, अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए, कजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के रास्ते रेल मार्ग से चीन को तेल भेजना शुरू कर दिया है। यह वही मार्ग है जिसे अमेरिका कभी भी ब्लॉक नहीं कर पाएगा। अब 2006 में शुरू हुआ यह सपना हकीकत बनता दिख रहा है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है। अब तनाव केवल मध्य पूर्व में नहीं है। अमेरिका के विदेश मंत्री मोको रूबियो और चीन के वोंग ई के बीच हुई बातचीत ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। चीन ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ट्रंप बीजिंग आएं, उनका स्वागत है।