भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग में वृद्धि
भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग में हालिया वृद्धि ने वैश्विक संकट के समय में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण भारत की तेल आपूर्ति में कमी आई है, लेकिन रूस ने इस संकट में भारत की मदद की है। अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंध हटाने के बाद, भारत ने रूस से अधिक मात्रा में तेल खरीदा है। इस स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
Apr 22, 2026, 11:39 IST
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रूस के साथ संबंध
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कहानी उभरकर सामने आई है, जिसमें भारत और रूस के बीच बढ़ती दोस्ती और सहयोग का जिक्र है। मिडिल ईस्ट में तनाव, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ हार्मोज़ के ठप होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है, जिसका सीधा प्रभाव भारत पर भी पड़ा है। मार्च में कच्चे तेल का आयात लगभग 13% घट गया है, जो मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति में रुकावट के चलते हुआ है। इस संकट के बीच, भारत और रूस ने एक बार फिर से अपनी गहरी दोस्ती का परिचय दिया है, जब भारत ने रूस से भारी मात्रा में तेल का आयात किया।
हॉर्मोज़ स्ट्रेट से दुनिया के लगभग 20% तेल का आवागमन होता है। लेकिन युद्ध जैसी स्थिति के कारण यह मार्ग लगभग बंद हो गया है। कई टैंकर रास्ते में फंसे हुए हैं और कुछ पर हमलों की भी खबरें आई हैं, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देश पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे समय में रूस ने भारत की मदद की है और तेल आपूर्ति को जारी रखा है। मार्च में, रूस से भारत का तेल आयात लगभग दोगुना होकर 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो भारत के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, के लिए यह बढ़ती आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। मार्च में कुल आयात लगभग 45 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जिसमें रूस की हिस्सेदारी सबसे अधिक थी।
इस बीच, भारत की मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। यूएई और इराक जैसे देशों से भारत का तेल आयात कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है, और मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी कुल आयात में घटकर 26.3% रह गई है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने भी इस स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिका ने वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया और रूस से तेल खरीदने पर छूट दी। भारत ने इस छूट का लाभ उठाते हुए रूस से अधिक मात्रा में तेल खरीदा, जिससे उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। मिडिल ईस्ट से आपूर्ति कम होने के कारण भारत ने कुछ अफ्रीकी देशों, जैसे कि अंगोला से भी तेल आयात बढ़ाया है। फिर भी, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। कुल मिलाकर, यह स्थिति यह दर्शाती है कि वैश्विक संकट के समय भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और भी मजबूत हुआ है।