भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के बीच पश्चिम एशिया तनाव पर चर्चा
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बातचीत
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो के साथ फोन पर विस्तृत चर्चा की। यह बातचीत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों के संदर्भ में हुई। ईरान द्वारा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की नाकेबंदी के कारण ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।
जयशंकर और रुबियो के बीच यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दी गई समय सीमा को बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में बताया कि उनकी बातचीत का मुख्य विषय पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर केंद्रित था।
उन्होंने कहा, 'हमारी चर्चा का केंद्र पश्चिम एशिया संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव थे। हमने ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित चिंताओं पर भी बात की और संपर्क में रहने पर सहमति बनी।'
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, जयशंकर और रुबियो ने आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने बताया कि रुबियो ने जयशंकर से बात की और दोनों मंत्रियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
पिगोट ने कहा कि दोनों ने आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की और हालात पर चर्चा की। उन्होंने कहा, 'पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया और क्षेत्र में भारतीय समुदाय को उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।'
इस बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूत शामिल हुए। माना जा रहा है कि इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की गई।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध करने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से का मार्ग है।
पश्चिम एशिया भारत के ऊर्जा खरीद का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। जयशंकर ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष विजेता हेराथ से भी बातचीत की और कहा, 'पश्चिम एशिया संघर्ष के परिणामों पर चर्चा की। भारत 'पड़ोसी सर्वोपरि' और 'विजन महासागर' के प्रति प्रतिबद्ध है।