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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सकारात्मक संकेत

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की स्थिति पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सही दिशा में चल रही है और कोई बड़ी चुनौती नहीं है। भारत ने जून 2026 के व्यापार आंकड़े जारी किए हैं, और सरकार का मानना है कि समझौते पर प्रगति से व्यापार में वृद्धि होगी। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के बारे में और क्या कहा गया है।
 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने सोमवार को जानकारी दी कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में कोई समस्या नहीं दिखती है। उन्होंने कहा कि सही समय आने पर दोनों पक्ष इस पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं। जून 2026 के व्यापार आंकड़ों पर मीडिया को जानकारी देते हुए, अग्रवाल ने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में कोई चुनौती नहीं है। उन्होंने कहा कि बातचीत एक निर्धारित ढांचे के तहत चल रही है और दोनों पक्षों के बीच निरंतर संवाद हो रहा है। हाल ही में हुई बैठकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय टीम मई में अमेरिका गई थी, जबकि अमेरिकी टीम जून में भारत आई थी।


व्यापार के व्यापक माहौल पर अग्रवाल ने कहा कि IEEPA टैरिफ हटा दिया गया है और अब अमेरिका अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत भी इस प्रक्रिया में शामिल है और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है।


दोनों सरकारों ने सार्वजनिक रूप से सकारात्मक रुख अपनाया है। कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा, "दोनों पक्षों का कहना है कि सब कुछ सही चल रहा है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डील की स्थिति क्या है। भारत-अमेरिका फ्रेमवर्क डील तैयार है और हम हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं। बस सही समय का इंतज़ार है।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक तैयारी पूरी हो चुकी है और चीजें व्यवस्थित हो रही हैं। व्यापार का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, और उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के बावजूद सामानों के आदान-प्रदान में तेजी की ओर इशारा किया।


हालांकि, अग्रवाल ने कोई निश्चित समय-सीमा या तारीख नहीं बताई, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अब सुलझाने के लिए कोई बड़ा मतभेद नहीं बचा है। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने जून 2026 के व्यापार आंकड़े जारी किए हैं और नई दिल्ली टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर वाशिंगटन और अन्य साझेदारों के साथ बातचीत कर रही है। सरकार का मानना है कि डील पर प्रगति से कुल व्यापार वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और निर्यातकों तथा आयातकों के लिए अधिक स्पष्टता और स्थिरता आएगी।