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भवानीपुर विधानसभा चुनाव: ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच चुनावी मुकाबला होने जा रहा है। इस सीट का महत्व राज्य की राजनीति में काफी अधिक है। जानें कैसे दोनों नेता अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं और 2026 के चुनावी समीकरण क्या हो सकते हैं।
 

भवानीपुर विधानसभा चुनाव का महत्व

भवानीपुर विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता चुनावी मैदान में हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी उन्हें सीधी चुनौती दे रहे हैं। आइए, इस सीट के समीकरणों पर एक नजर डालते हैं...


TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला

तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी की ओर से सुवेंदु अधिकारी चुनावी दौड़ में हैं। इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी के प्रदीप प्रसाद और सीपीएम के श्रीजीब बिस्वास भी चुनावी मैदान में हैं। हालांकि, इस सीट पर मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है। यह सीट दक्षिण कोलकाता में स्थित है और राज्य की राजनीति में इसका विशेष महत्व है।


भाजपा का चक्रव्यूह

इस बार सुवेंदु अधिकारी ममता के गढ़ में चुनौती पेश कर रहे हैं, जिसे भाजपा चक्रव्यूह के रूप में देख रही है। वहीं, टीएमसी इसे अपनी ताकत का प्रदर्शन मानती है। 2021 में भवानीपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी थी, जहां टीएमसी के उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने जीत हासिल की थी और भाजपा के रुद्रनील घोष दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस और अन्य उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत कम वोट मिले थे।


ममता बनर्जी की उपचुनाव में जीत

2021 में ममता बनर्जी ने भवानीपुर से उपचुनाव लड़ा था और अक्टूबर में उन्होंने रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की थी। इस दौरान उन्होंने भाजपा की उम्मीदवार प्रियंका तिबरेवाल को लगभग 58,835 वोटों से हराया था।


2026 का चुनावी समीकरण

इस बार पश्चिम बंगाल में मुख्य लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कुछ सुधार दिखाया था, लेकिन टीएमसी अभी भी मजबूत स्थिति में है।