भवानी प्रसाद मिश्र की 'त्रिकाल संध्या': आपातकाल पर एक साहित्यिक प्रतिरोध
भवानी प्रसाद मिश्र की 'त्रिकाल संध्या' एक महत्वपूर्ण कविता संग्रह है, जो आपातकाल की कठिनाइयों पर प्रकाश डालता है। इस पुस्तक पर आयोजित चर्चा में साहित्यकारों ने मिश्र की कविताओं को प्रतिरोध का एक सशक्त माध्यम बताया। जानें इस चर्चा में और क्या कहा गया और कैसे मिश्र ने अपने लेखन के माध्यम से समाज को जागरूक किया।
Jun 28, 2026, 18:42 IST
भवानी प्रसाद मिश्र की कविता का महत्व
‘त्रिकाल संध्या’ भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण कविता संग्रह है, जो आपातकाल की कठोरता पर तीखा प्रहार करता है। यह केवल शिकायत का माध्यम नहीं है, बल्कि कविताएं प्रतिरोध का एक सशक्त साधन बन जाती हैं। अंधकार में भी यह संग्रह आशा और उजाले का मार्ग दिखाता है।
साहित्यकारों की चर्चा
यह विचार सुप्रसिद्ध लेखिका शकुंतला मित्तल ने व्यक्त किए। वे इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा प्रवासी भवन, नई दिल्ली में आयोजित ‘त्रिकाल संध्या (आपातकाल की कविताएं)’ पुस्तक पर चर्चा के दौरान बोल रही थीं।
मित्तल ने बताया कि इस पुस्तक में कवि ने 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लागू किए गए आपातकाल के दौरान की कठिनाइयों को सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त किया है।
आपातकाल का भयावह माहौल
वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि आपातकाल के दौरान जब लोगों की गिरफ्तारी, प्रेस पर सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई, तब भवानी प्रसाद मिश्र नियमित रूप से (त्रिकाल—सुबह, दोपहर, शाम) कविताएं लिखते रहे। यह उनके क्रांतिकारी मन की अभिव्यक्ति थी, जिसने समाज पर गहरा प्रभाव डाला।
साहित्यिक प्रतिरोध की आवश्यकता
डॉ. नवीन नीरज ने कहा कि आपातकाल के समय कई कवि सत्ता के डर से चुप रहे, जबकि भवानी प्रसाद मिश्र ने ‘त्रिकाल संध्या’ के माध्यम से सार्थक प्रतिरोध किया। युवा लेखिका गुंजन शर्मा ने बताया कि मिश्र ने इस जटिल समय में भी अपनी सरल साहित्यिक शैली को बनाए रखा।
युवा पत्रकार विवेक वशिष्ठ ने कहा कि ‘त्रिकाल संध्या’ स्वतंत्रता के दमन के खिलाफ एक ऐतिहासिक काव्य-प्रतिरोध है।
कार्यक्रम का संचालन
इस पुस्तक चर्चा का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक मोनिका जायसवाल ने किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के सदस्य मुन्ना रजक, शिवम पांडेय, वैभव कृष्ण तिवारी, और विकास आनंद ने भाग लिया।