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ब्रेन स्ट्रोक के बाद रिकवरी: जानें जरूरी टिप्स और गोल्डन पीरियड

भारत में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि हो रही है, जिसके बाद मरीजों को सही देखभाल और रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के बाद का गोल्डन पीरियड 6 से 12 हफ्ते होता है, जिसमें उचित देखभाल से मरीज की सेहत में सुधार संभव है। जानें कि स्ट्रोक के बाद रिकवरी के लिए क्या करना चाहिए और रिहैबिलिटेशन सेवाओं की आवश्यकता क्यों है।
 

ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि

हाल के वर्षों में भारत में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी गई है। स्ट्रोक के बाद मरीजों की सेहत का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है, विशेषकर रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में एक प्रभावी रिकवरी योजना का होना अनिवार्य है। इसमें दवाएं, फिजियोथेरेपी और नियमित फॉलोअप शामिल हैं।


सही इलाज के बाद की देखभाल

विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। एक उचित रिकवरी योजना का होना आवश्यक है, क्योंकि इसके अभाव में स्वास्थ्य समस्याएं फिर से उत्पन्न हो सकती हैं। मरीजों को यह जानना चाहिए कि उन्हें कब कौन सी थेरेपी लेनी है, कौन सी दवाएं लेनी हैं और रिहैबिलिटेशन कब तक जारी रहनी चाहिए।


रिकवरी का गोल्डन पीरियड

HCAH के अध्यक्ष डॉ. गौरव ठुकराल के अनुसार, स्ट्रोक के बाद के शुरुआती हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय दिमाग न्यूरोप्लास्टी की अवस्था में होता है, जिससे वह खुद को पुनः व्यवस्थित कर सकता है। स्ट्रोक के बाद 6 से 12 हफ्तों का समय रिकवरी के लिए गोल्डन पीरियड माना जाता है। यदि इस दौरान उचित देखभाल, व्यायाम और रिहैबिलिटेशन मिले, तो मरीज की सेहत में काफी सुधार हो सकता है।


रिहैबिलिटेशन सेवाओं की आवश्यकता

डॉ. गौरव के अनुसार, देश में रिहैबिलिटेशन सेवाओं को बढ़ाने की आवश्यकता है। वर्तमान में लगभग 1,200 स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन सेंटर हैं, जो जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम हैं। इनकी संख्या में वृद्धि से मरीजों को स्ट्रोक के बाद बेहतर रिकवरी में सहायता मिलेगी।


स्ट्रोक के बाद रिकवरी के लिए सुझाव

स्ट्रोक के उपचार के बाद रिकवरी का समय शुरू होता है। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी का पालन करें। यदि किसी को बोलने या खाने में कठिनाई हो रही है, तो ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं समय पर लें और नियमित चेकअप कराना न भूलें।