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ब्रिक्स बैठक: वैश्विक सुरक्षा और बहुपरकता की नई दिशा

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक में वैश्विक सुरक्षा और बहुपरकता पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। अजीत डोभाल ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत करते हुए पश्चिम एशिया में स्थिरता की उम्मीद जताई। बैठक में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, और भारत-चीन संबंधों पर भी चर्चा की गई। जानें इस बैठक के प्रमुख बिंदुओं और भारत की कूटनीतिक पहल के बारे में।
 

ब्रिक्स की 16वीं बैठक का महत्व

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक एक महत्वपूर्ण समय पर हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, साइबर हमले और बदलती शक्ति संरचना के बीच नई दिशा की तलाश की जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता भारत ने की, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स अब वैश्विक सुरक्षा और बहुपरकता का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।


पश्चिम एशिया में स्थिरता की उम्मीद

बैठक में पश्चिम एशिया के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया। डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हुए 'सतर्क आशावाद' व्यक्त किया। उनका कहना था कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को भी मजबूती मिलेगी। भारत ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के खुलने को एक सकारात्मक विकास बताया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर प्रभाव डालता है।


गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर चिंता

डोभाल ने अपने संबोधन में गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तेजी से डिजिटल होती दुनिया में साइबर हमले और छद्म आतंकवाद पारंपरिक सुरक्षा उपायों को चुनौती दे रहे हैं। आतंकवाद अब सीमाओं में बंधा नहीं है, और साइबर खतरे देशों की अर्थव्यवस्था और नागरिक ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं।


आतंकवाद विरोधी सहयोग की आवश्यकता

ब्रिक्स बैठक में आतंकवाद विरोधी सहयोग और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा पर चर्चा की गई। भारत ने सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। यह संदेश महत्वपूर्ण है क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर युद्ध अब वैश्विक शक्ति संघर्ष के नए हथियार बन चुके हैं।


भारत की कूटनीतिक पहल

इस बैठक में भारत की सक्रिय कूटनीतिक पहल भी महत्वपूर्ण रही। डोभाल ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव से मुलाकात की और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। इसके अलावा, भारत ने इथियोपिया के सुरक्षा सेवा के निदेशक के साथ भी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर बातचीत की।


भारत-चीन संबंधों में प्रगति

ब्रिक्स बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत हुई। डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की और संबंधों में सामान्य स्थिति को सकारात्मक संकेत माना।


ब्रिक्स की बैठक का समापन

इस बैठक में रूस, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, और अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की गई। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास' के केंद्रीय विषय पर केंद्रित रहा।


नई वैश्विक राजनीति की दिशा

ब्रिक्स की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया नए शक्ति संतुलन की ओर बढ़ रही है। भारत ने इस मंच से यह संदेश दिया कि भविष्य की वैश्विक राजनीति केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि तकनीकी सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और बहुपरक सहयोग से तय होगी।