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ब्रह्मचर्य के नियम: गृहस्थ जीवन में संबंध बनाने की सही विधि

गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करना एक चुनौती हो सकता है। प्रेमानंद जी महाराज ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि विवाहित जीवन में संबंध बनाने का सही तरीका क्या है। उन्होंने मासिक धर्म के बाद संबंध बनाने की उचित संख्या और इसके धार्मिक महत्व पर चर्चा की है। जानें कि प्रेमानंद जी महाराज का क्या कहना है और कैसे उन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया है।
 

गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन


गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि पति धार्मिक स्वभाव का है, तो पत्नी का ध्यान रखना कठिन हो सकता है, और यदि पत्नी भक्ति मार्ग पर है, तो पति की इच्छाओं को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। फिर भी, विवाहित जीवन में संबंध बनाना आवश्यक माना जाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से, संबंध बनाने का मुख्य उद्देश्य संतान उत्पत्ति है। लेकिन वर्तमान समय में कई पुरुष इसे आनंद के लिए भी करते हैं। इस पर वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज ने अपने विचार साझा किए हैं। आइए जानते हैं कि उन्होंने बताया कि महीने में पत्नी के साथ कितनी बार संबंध बनाना उचित है।


प्रश्न: गृहस्थी के लिए ब्रह्मचर्य का क्या नियम होता है?

प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर है कि मासिक धर्म के आठ दिन बाद केवल एक बार संबंध बनाना चाहिए, यही शास्त्रों के अनुसार सही तरीका है। उन्होंने एक कहानी सुनाई जिसमें एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा कि विवाह के बाद जीवन कैसे व्यतीत होगा। गुरु ने कहा, 'वर्ष में एक बार संबंध बनाओ।' शिष्य ने कहा, 'यह संभव नहीं है।' फिर गुरु ने कहा, 'छह महीने में एक बार।' शिष्य ने फिर से असहमति जताई। अंत में गुरु ने बताया कि महीने में एक बार संबंध बनाना उचित है।


प्रेमानंद जी ने आगे कहा कि आजकल लोग महीने में पांच से आठ बार संबंध बनाते हैं, फिर भी जीवित हैं, यह महत्वपूर्ण है। एक मन (लगभग 40 किलो) अन्न, पानी और दूध जैसे पदार्थों के पाचन से एक बार संतान उत्पत्ति के लिए आवश्यक वीर्य बनता है। जो लोग इसे बार-बार नष्ट करते हैं, उनकी जीवन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए, वही गृहस्थ ब्रह्मचारी कहलाता है जो एक पत्नीव्रती हो और महीने में एक बार ही संतान उत्पत्ति के उद्देश्य से संबंध बनाएं।


प्रश्न: अगर संतान उत्पत्ति का उद्देश्य न हो तो?

प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर है कि फिर भी व्याभिचार की अनुमति नहीं है। शास्त्रों में इसकी अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि, यदि कोई पति-पत्नी महीने में एक बार संबंध बनाते हैं, भले ही संतान उत्पत्ति का विचार न हो, तो भी इसे पाप नहीं माना जाता।


प्रेमानंद जी महाराज की प्रसिद्धि का कारण

प्रेमानंद जी महाराज राधा रानी और कृष्ण के भक्त हैं। उनका अटूट विश्वास है कि नाम जप से जीवन को भगवत मार्ग पर ले जाया जा सकता है। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रेरित किया है। लोग उन्हें सुनकर अपनी बुरी आदतें छोड़ देते हैं और राधा नाम से जुड़ जाते हैं.


प्रेमानंद जी महाराज की स्वास्थ्य स्थिति

प्रेमानंद जी को किडनी की बीमारी है। उनकी दोनों किडनियाँ पिछले 20 वर्षों से फेल हैं और वह डायलिसिस पर हैं। लेकिन उनका कहना है कि राधा रानी उन्हें चलाए रखती हैं। जब समय पूरा होगा, वह उन्हें बुला लेंगी।


प्रेमानंद जी महाराज का निवास स्थान

प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन में रहते हैं, जहां वे श्री राधाकेली कुंज आश्रम में निवास करते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास एक छोटे से गांव में हुआ था, लेकिन उन्होंने 13 वर्ष की आयु में अपना घर छोड़ दिया था।