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ब्नेई मेनाशे समुदाय का इजराइल में भव्य स्वागत, नए जीवन की शुरुआत

ब्नेई मेनाशे समुदाय के लगभग 250 सदस्य इजराइल पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। यह समुदाय अपने प्राचीन इजराइली वंशज होने का दावा करता है और इजराइल सरकार ने उन्हें बसाने की योजना बनाई है। इस प्रक्रिया में पहचान, आस्था और इतिहास की गहरी यात्रा शामिल है। जानें इस ऐतिहासिक पल के बारे में और आने वाले दिनों में क्या योजनाएं हैं।
 

ब्नेई मेनाशे समुदाय का इजराइल आगमन

मिजोरम और मणिपुर से संबंधित ब्नेई मेनाशे समुदाय के लगभग 250 सदस्य इजराइल पहुंचे, जहां उनका शानदार स्वागत किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यह समूह शुक्रवार की सुबह बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरा। यह पहला दल है जो पिछले साल नवंबर में इजराइली सरकार द्वारा इस समुदाय के हजारों सदस्यों को बसाने के निर्णय के बाद वहां पहुंचा है।


उत्सव का माहौल

हवाई अड्डे पर सभी का स्वागत उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। समुदाय के लोग पारंपरिक परिधानों में थे, पुरुषों ने हाथ से बुनी टोपी पहनी थी और महिलाओं ने सिर ढका हुआ था। पहले से मौजूद समुदाय के सदस्यों और अन्य शुभचिंतकों ने छोटे इजराइली झंडे लहराते हुए उनका स्वागत किया। इस अवसर पर पारंपरिक धार्मिक गीत भी गाए गए, जिससे माहौल और भी भावुक हो गया।


आने वाले दिनों की योजना

समूह में शामिल चाविमावी ने बताया कि यह केवल शुरुआत है और जल्द ही और लोग दिल्ली से इजराइल के लिए रवाना होंगे। मणिपुर से भी कई सदस्य वहां पहुंचने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वहां पहुंचते ही उन्हें नागरिकता प्रदान की गई और उनके स्वागत के लिए विशेष आयोजन किया गया। फिलहाल, इन लोगों को उत्तरी इजराइल के नासरत क्षेत्र में बसाया जाएगा, जहां उनके लिए रहने की व्यवस्था की गई है।


ब्नेई मेनाशे की पहचान

ब्नेई मेनाशे समुदाय अपने आप को प्राचीन इजराइली जनजाति मेनाशे का वंशज मानता है। उनकी मौखिक परंपरा के अनुसार, उनके पूर्वज सदियों पहले पश्चिम एशिया से निकलकर फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन होते हुए पूर्वोत्तर भारत पहुंचे थे। इस लंबे प्रवास के दौरान उन्होंने कई यहूदी परंपराओं को जीवित रखा। हालांकि, 19वीं सदी में ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में कई लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए, फिर भी उन्होंने अपनी प्राचीन पहचान को बनाए रखा। इजराइल पहुंचने के बाद उन्हें औपचारिक रूप से यहूदी धर्म में पुनः दीक्षित होना होगा, जो वहां की नागरिकता प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।


इजराइल की योजना

इजराइल सरकार ने वर्ष 2030 तक लगभग छह हजार ब्नेई मेनाशे लोगों को चरणबद्ध तरीके से बसाने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत 2026 में लगभग बारह सौ लोगों को हवाई मार्ग से लाने का लक्ष्य रखा गया है। अगले दो सप्ताह में दो और उड़ानों की योजना बनाई गई है, जिससे इस प्रक्रिया को तेजी दी जा सके। इस पुनर्वास कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं।


चुनाव प्रक्रिया

इस समुदाय के लोगों का चयन एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया के तहत किया गया। पिछले वर्ष दिसंबर में नौ रब्बियों का एक दल आइजोल पहुंचा था, जहां उन्होंने लगभग तीन सौ लोगों का चयन किया। इस दौरान कई सप्ताह तक जांच और पहचान की प्रक्रिया चली, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक आधारों पर चयन किया गया।


पहचान और इतिहास

यह पूरी प्रक्रिया केवल एक प्रवास नहीं बल्कि पहचान, आस्था और इतिहास से जुड़ी एक गहरी यात्रा है। ब्नेई मेनाशे समुदाय के लिए यह अपने मूल से पुनः जुड़ने का अवसर है, जबकि इजराइल के लिए यह अपने बिखरे हुए ऐतिहासिक समुदायों को वापस लाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले वर्षों में यह प्रक्रिया और तेज होगी, जिससे हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इजराइल ने इस पहल के लिए भारत सरकार से कोई बात की थी।