बोडोलैंड चुनाव: असम की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़
बोडोलैंड का राजनीतिक परिदृश्य
ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर बोडोलैंड असम की राजनीति में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। इसे बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के नाम से भी जाना जाता है। यह असम का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जिसमें कोकराझार, चिरांग, उदालगुड़ी, बक्सा और तामुलपुर जैसे पांच जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में विधानसभा की 15 सीटें हैं, और यहां के मुद्दे असम के अन्य हिस्सों से भिन्न हैं। लंबे समय से हिंसा का सामना कर रहे इस क्षेत्र में अलग राज्य की मांग को लेकर संघर्ष जारी है। ऐसे में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में इन 15 सीटों का परिणाम महत्वपूर्ण हो सकता है।
बोडोलैंड का ऐतिहासिक संदर्भ
बोडोलैंड की राजनीति को समझने के लिए इसके इतिहास को जानना आवश्यक है। यह इतिहास बोडो जनजाति की पहचान, अधिकार और स्वायत्तता की मांग से जुड़ा हुआ है। 1980 के दशक में ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन (ABSU) के नेतृत्व में अलग बोडोलैंड राज्य की मांग उठी, जो कई बार हिंसक आंदोलनों में बदल गई। 1993 में पहला बोडो समझौता हुआ, लेकिन इससे स्थायी समाधान नहीं निकला। 2003 में भारत सरकार, असम सरकार और बोडो लिब्रेशन टाइगर्स के बीच समझौते से बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) का गठन हुआ, जिससे क्षेत्र को स्वायत्त शासन मिला। 2020 में हुए नए समझौते के तहत BTR को और मजबूत किया गया, जिससे यह असम में एक स्वायत्त क्षेत्र के रूप में स्थापित हुआ।
चुनावी मुद्दे
- बोडो और गैर-बोडो के बीच पहचान की राजनीति प्रमुख मुद्दा है।
- भूमि और अतिक्रमण हटाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
- शांति और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है।
- विकास, जैसे सड़क, शिक्षा और रोजगार पर जोर दिया जा रहा है।
- 2020 के बोडो समझौते को लागू करने पर बहस चल रही है।
- BPF और UPPL के बीच सीधा मुकाबला है।
- गठबंधन टूटने से त्रिकोणीय चुनाव की स्थिति बन गई है।
चुनावी समीकरण
BTR क्षेत्र में कुल 15 विधानसभा सीटें हैं, जहां क्षेत्रीय पार्टियों और दोनों गठबंधनों के बीच मुकाबला हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के बीच गठबंधन है। इस बार बीजेपी की पुरानी सहयोगी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) सभी 15 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। बीजेपी 5 सीटों पर और BPF 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। विपक्षी गठबंधन की बात करें तो कांग्रेस 15 में से 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि अन्य दो सीटों पर राजोर दल और टीएमसी (जी) चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा भी चुनाव में भाग ले रहा है।
किस पार्टी को मिल सकता है लाभ?
बोडो क्षेत्र में चुनाव असम के अन्य हिस्सों से भिन्न होते हैं। यहां चुनाव स्थानीय मुद्दों पर आधारित होते हैं। BPF और UPPL प्रमुख पार्टियां हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में BPF हाग्रामा मोहिलारी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन अब वे सीएम हिमंत के सहयोगी बन गए हैं। हालांकि बीजेपी राज्य में बड़ी पार्टी है, लेकिन इस क्षेत्र में हाग्रामा मोहिलारी की BPF की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रमोद बोरो, जो इस क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता हैं, की पार्टी UPPL ने 2021 में बीजेपी के साथ चुनाव लड़ा था। लेकिन इस बार UPPL ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है। इस स्थिति में BPF और UPPL के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
कांग्रेस को इस क्षेत्र में झटका लग सकता है, क्योंकि उनकी पुरानी सहयोगी BPF अब बीजेपी के साथ गठबंधन में है। कांग्रेस अकेले 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि अन्य पार्टियां 2 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर जब झारखंड मुक्ति मोर्चा भी चुनाव में भाग ले रहा है।