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बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश को मिल रही धमकियाँ, दाऊदी बोहरा विवाद में नया मोड़

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम एस पटेल और उनके परिवार को महीनों से धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब न्यायमूर्ति पटेल ने मुफद्दल सैफुद्दीन को आध्यात्मिक नेता के रूप में मान्यता दी। हाल ही में लंदन में उनकी बेटी पर हुए हमले ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में।
 

बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पर धमकियों का साया

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में हालिया ऐतिहासिक निर्णय के बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और उनके परिवार को महीनों से धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। न्यायमूर्ति गौतम एस पटेल, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, और उनके परिवार को पिछले 10 महीनों में भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों से धमकी भरे पत्र प्राप्त हुए हैं। इस साल की शुरुआत में लंदन में उनकी बेटी पर हुए शारीरिक हमले ने इस मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।


दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद का विवरण

यह विवाद 23 अप्रैल, 2024 को शुरू हुआ, जब न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने दाऊदी बोहरा समुदाय के भीतर लंबे समय से चल रहे उत्तराधिकार विवाद में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। अपने निर्णय में, न्यायमूर्ति पटेल ने मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेता, 53वें दाई अल-मुत्लक के रूप में मान्यता दी। अदालत ने ताहिर फखरुद्दीन के दावे को खारिज कर दिया, जो सैफुद्दीन के पद को चुनौती दे रहे थे। हालांकि, इस एकल न्यायाधीश के निर्णय को उत्तराधिकार विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। इस निर्णय को बॉम्बे उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई है, जहां इस मामले से संबंधित कार्यवाही अभी भी चल रही है।