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बॉम्बे उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय: निर्विरोध उम्मीदवारों की वैधता पर फैसला

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में निर्विरोध उम्मीदवारों की वैधता पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत बिना मतदान के उम्मीदवारों को निर्वाचित करना सही है। याचिकाकर्ता अविनाश जाधव ने आरोप लगाया था कि कुछ क्षेत्रों में अन्य उम्मीदवारों ने दबाव में अपना नामांकन वापस लिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के दावों को ठुकराते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया कानून के अनुसार चल रही है। जानें इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी।
 

निर्विरोध चुनावों पर अदालत का निर्णय

महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से पहले, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कई वार्डों में निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने निर्विरोध जीत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनों के अनुसार, बिना मतदान के उम्मीदवारों को निर्वाचित करना वैध है।


याचिका का विवरण

याचिका किस बारे में थी?


यह याचिका महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के नेता अविनाश जाधव द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने यह तर्क दिया कि बिना मतदान कराए उम्मीदवारों को विजेता घोषित करना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ क्षेत्रों में अन्य उम्मीदवारों ने दबाव या प्रलोभन के कारण अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे कोई प्रतिस्पर्धा नहीं रह गई।


अदालत का निर्णय

अदालत ने दलीलें खारिज कीं


बॉम्बे उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में असफल रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया कानून के अनुसार चल रही है और हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है। यदि किसी वार्ड में केवल एक वैध उम्मीदवार हो, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित करना चुनाव कानूनों के अनुरूप है। वर्तमान व्यवस्था के तहत यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसे मामलों में जिम्मेदारी से अदालत का रुख करने की सलाह भी दी।