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बिहार में स्थापित होगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, जानें खास तिथि और आयोजन की तैयारी

बिहार के पूर्वी चंपारण में 17 जनवरी 2026 को दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन में पवित्र स्थलों के जल से महाभिषेक किया जाएगा। जानें इस विशेष तिथि का महत्व और आयोजन की तैयारी के बारे में।
 

बिहार में शिवलिंग की स्थापना की तैयारी

बिहार पहुंचा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग

बिहार के पूर्वी चंपारण में शिवलिंग की स्थापना: पूर्वी चंपारण जिले के चकिया-केसरिया मार्ग पर विराट रामायण मंदिर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की भव्य तैयारी चल रही है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लाया गया है और इसकी स्थापना 17 जनवरी 2026 को विधि-विधान के साथ की जाएगी।

इस अवसर पर हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर जैसे पांच पवित्र स्थलों के जल से शिवलिंग का महाभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की जाएगी।

माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि का महत्व

17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि है, जिसे धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग की उत्पत्ति का दिन माना जाता है। इसी दिन भगवान शिव की पहली बार शिवलिंग रूप में पूजा की गई थी। पटना स्थित महावीर मंदिर न्यास के अनुसार, यह शिवलिंग सहस्र शिवलिंग के रूप में स्थापित किया जा रहा है, और पिछले एक हजार वर्षों में इस प्रकार की स्थापना कहीं नहीं हुई है। इसलिए इस आयोजन को अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जा रहा है।

पंडित भवनाथ झा की देखरेख में स्थापना

विराट रामायण मंदिर परिसर में सहस्र शिवलिंग की पीठ-स्थापना और पूजा की जिम्मेदारी प्रसिद्ध विद्वान पंडित भवनाथ झा के हाथ में होगी। उन्होंने बताया कि पीठ-स्थापना माघ कृष्ण चतुर्दशी, जिसे नरक निवारण चतुर्दशी भी कहा जाता है, इस दिन की जाएगी। शास्त्रों के अनुसार यह तिथि शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

ईशान संहिता में उल्लेख है कि इसी महानिशा में भगवान शिव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस पवित्र अवसर पर परंपरागत रूप से व्रत भी रखा जाता है। इसी कारण सहस्र शिवलिंग की पीठ-स्थापना इसी दिन की जा रही है। पूजा पूरी तरह शास्त्रीय विधि से होगी, जिसमें एक भव्य यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। इस यज्ञ में चारों वेदों और आगम शास्त्रों के विद्वान भाग लेंगे।

भगवान शिव के सहस्र स्वरूपों की स्थापना

पंडित भवनाथ झा ने बताया कि शिव लिंग की स्थापना प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि यह सदियों बाद हो रहा है। विभिन्न पवित्र नदियों और संगम स्थलों से जल, बालू और मिट्टी मंगाई जा रही है। ग्रंथों के अनुसार विधि तैयार की गई है, जिसके तहत अष्टकमल यंत्र पर शिव के आठ स्वरूपों की स्थापना होगी। आठों दिशाओं में देवताओं का आवाहन किया जाएगा और मध्य में पार्वती सहित भगवान शिव के सहस्र स्वरूप स्थापित होंगे, जो युगों तक श्रद्धालुओं का कल्याण करेंगे।

स्थापना के दिन सुबह 8:30 बजे से पूजा शुरू होगी और दोपहर में शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। पूजा के बाद प्रसाद और भोजन का वितरण होगा। महावीर मंदिर से सात पंडित विशेष रूप से पूजन के लिए आएंगे। शिवलिंग की स्थापना के बाद अलग से नंदी का निर्माण भी किया जाएगा, जिसे ब्लैक ग्रेनाइट स्टोन से तैयार किया जाएगा.