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बिहार में भूमि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए नई प्राथमिकता प्रणाली लागू

बिहार सरकार ने भूमि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए एक नई प्राथमिकता प्रणाली लागू की है। इस प्रणाली के तहत SC-ST, विधवा महिलाएं, सैनिक और अन्य विशेष श्रेणियों के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। FIFO प्रणाली को 30 जून 2026 तक स्थगित कर दिया गया है, जिससे संवेदनशील मामलों का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा। नए नियमों के तहत आम जनता को राहत मिलेगी, जिससे उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह पहल 'ईज ऑफ लिविंग' को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

बिहार सरकार का नया प्रशासनिक निर्णय


बिहार सरकार ने भूमि से संबंधित मामलों के त्वरित समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। अब राज्य में भूमि विवादों और राजस्व मामलों के निपटारे के लिए प्राथमिकता आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। इस प्रणाली के तहत अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST), विधवा महिलाएं, सैनिक, सेवानिवृत्त जवान, सुरक्षाकर्मी और केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामलों को पहले निपटाया जाएगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य है कि कमजोर वर्गों को न्याय के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने निर्देश दिया है कि इन मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द निपटारा किया जाए।

FIFO प्रणाली पर रोक
इस नए आदेश के तहत राज्य में लागू First In First Out (FIFO) प्रणाली को 30 जून 2026 तक स्थगित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि भूमि मामलों का निपटारा अब प्राथमिकता श्रेणी के आधार पर किया जाएगा, न कि पुराने या नए आवेदन के क्रम में। सरकार का मानना है कि संवेदनशील मामलों में देरी से लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। यदि किसी स्तर पर इन निर्देशों की अनदेखी की जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता को राहत
नए नियमों के तहत आम जनता को भी राहत मिलेगी। विशेष श्रेणी के आवेदकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जरूरत पड़ने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी जा सकती है। इसके अलावा, वे अपने प्रतिनिधि या वकील के माध्यम से भी अपने मामलों की सुनवाई करवा सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए सहायक होगी, जहां भूमि विवाद एक बड़ी समस्या हैं।

‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा
राज्य सरकार इस पहल को ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनसंवाद यात्रा और समृद्धि योजनाओं के दौरान भूमि विवादों के त्वरित निपटारे की मांग उठती रही है।

लापरवाही पर सख्ती
हाल ही में सारण (छपरा) और मुंगेर में समीक्षा बैठकों के दौरान यह पाया गया कि कुछ स्थानों पर अधिकारियों द्वारा निर्देशों का पालन ठीक से नहीं किया जा रहा था। इसके बाद विभाग ने सभी जिलों को सख्त निर्देश दिए हैं ताकि प्राथमिकता आधारित निपटारे में कोई ढिलाई न हो।

पारदर्शी प्रशासन पर जोर
राजस्व विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इन मामलों में संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य करें। सरकार का उद्देश्य है कि भूमि विवादों के समाधान की प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े और उन्हें समय पर न्याय मिल सके। इस नई व्यवस्था से बिहार में भूमि प्रशासन प्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है और लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा।