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बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर, गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड तोड़

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जहां गंगा का जलस्तर 2016 के रिकॉर्ड को पार कर गया है। 11 जिलों में बाढ़ का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, जबकि मौसम विभाग ने आगामी बारिश की चेतावनी दी है। जानें इस संकट के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

बिहार में बाढ़ की गंभीरता


बिहार में बाढ़ की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 2016 के पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर चुका है। 6 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि 2016 में यह 50.52 मीटर था। इसका मतलब है कि नदी का जलस्तर पिछले रिकॉर्ड से लगभग 5 सेंटीमीटर अधिक हो गया है।


बाढ़ का प्रभाव 11 जिलों में

गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ, बिहार के कई क्षेत्रों में बाढ़ का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, अरवल और पटना में बाढ़ का असर देखा गया है।


इन जिलों के लगभग 61 प्रखंडों की 300 से अधिक ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हुआ है, और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।


प्रभावित जनसंख्या का आंकड़ा

विभिन्न सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रभावित जनसंख्या का आंकड़ा भिन्न है। 6 सितंबर की रिपोर्ट में लगभग 16.85 लाख लोगों के प्रभावित होने का उल्लेख है, जबकि एक दिन पहले के आंकड़ों में यह संख्या 10.26 लाख थी।


अन्य नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में केवल गंगा ही नहीं, बल्कि गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर है। इससे नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है।


पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 2.84 मीटर ऊपर है। वहीं, पंडारक में भी गंगा ने अपने पुराने उच्चतम स्तर को पार कर लिया है, जिससे दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।


पटना में बाढ़ की चिंता

गांधी घाट पर गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण पटना के निचले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 5 सितंबर को कुछ घंटों में जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई थी। केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान में भी जलस्तर और बढ़ने की संभावना जताई गई है।


पटना के अलावा आरा और हाजीपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की खबरें आई हैं। हाजीपुर के कई वार्डों और आरा के कुछ वार्डों में जलभराव से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


राहत और बचाव कार्य

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। NDRF और SDRF की कई टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों का उपयोग किया जा रहा है।


राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के माध्यम से प्रभावित परिवारों को भोजन और आवश्यक सामग्री प्रदान की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और तटबंधों की निरंतर निगरानी करना है।


सरकार की सक्रियता

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। तटबंधों पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी समस्या के सामने आने पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।


अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ-साथ अन्य नदियों के दबाव को संभालना है। यदि बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो नए क्षेत्रों में भी जलभराव की संभावना बनी रह सकती है।


आगामी दिनों की महत्ता

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, बिहार के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


पटना में गंगा का 2016 का रिकॉर्ड टूटना बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति का संकेत है। नदी के बढ़ते जलस्तर, कई नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने और बड़ी जनसंख्या के प्रभावित होने के बीच आने वाले 24 से 48 घंटे प्रशासन और प्रभावित लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।