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बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जिसमें 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। राज्य के 15 जिलों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, जिसमें प्रशासन ने कई राहत शिविर स्थापित किए हैं। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। जानें इस संकट के बारे में और अधिक जानकारी।
 

बिहार में बाढ़ का संकट


पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। राज्य के 15 जिलों में 50 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और सैकड़ों ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 23 सितंबर 2026 तक लगभग 50.49 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कुल 576 ग्राम पंचायतें इस आपदा का शिकार हुई हैं.


नदियों का बढ़ता जलस्तर

बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बनाने में नदियों का बढ़ता जलस्तर एक प्रमुख कारण है। रिपोर्ट के अनुसार, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि गंगा ने भागलपुर के कहलगांव में खतरे का स्तर पार कर लिया है। इससे नदी किनारे बसे क्षेत्रों में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.


प्रभावित जिलों की सूची

बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ के प्रभाव से जूझ रहे हैं.


राहत और बचाव कार्य

प्रशासन ने प्रभावित लोगों तक भोजन और आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए राहत अभियान शुरू किया है। राज्य में 6 राहत शिविरों में 7,714 विस्थापित लोगों के लिए रहने की व्यवस्था की गई है। सामुदायिक रसोइयों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है.


मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार, 23 से 26 सितंबर के बीच बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। इस स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और लोगों की चिंता बढ़ गई है.


प्रशासन की प्राथमिकताएं

वर्तमान में प्रशासन का ध्यान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और जलस्तर पर नजर रखने पर केंद्रित है। पानी घटने के बाद ही बाढ़ से हुए नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा.