बिहार में नीतीश कुमार को उप-प्रधानमंत्री बनाने की मांग तेज
बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उप-प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठाई जा रही है। जेडीयू विधायक पंकज मिश्रा और आरजेडी नेता मुकेश रोशन ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए हैं। दोनों पार्टियों का मानना है कि नीतीश कुमार की केंद्रीय राजनीति में भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जानें इस पर और क्या कहा गया है और यह मांग बिहार की राजनीति में क्या बदलाव ला सकती है।
Jul 1, 2026, 16:07 IST
बिहार की राजनीति में नया मोड़
बिहार की राजनीतिक स्थिति से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसने दिल्ली से लेकर पटना तक सियासी हलचल पैदा कर दी है। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश का उप-प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठने लगी है। यह बात चौंकाने वाली है कि आरजेडी के बाद अब जेडीयू के भीतर से भी इस मांग का समर्थन किया जा रहा है। जेडीयू विधायक पंकज मिश्रा ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा है कि नीतीश कुमार में उप-प्रधानमंत्री बनने की सभी योग्यताएं हैं और बिहार की जनता भी यही चाहती है। जेडीयू का तर्क है कि जो नेता पिछले 20 वर्षों से बिहार की सत्ता संभाल रहे हैं और जिनके पास केंद्रीय मंत्री का लंबा अनुभव है, उन्हें अब दिल्ली की राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
आरजेडी का समर्थन
जेडीयू से पहले, आरजेडी के वरिष्ठ नेता मुकेश रोशन ने नीतीश कुमार को लेकर दिल्ली में एक नई बहस शुरू की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि नीतीश कुमार को केवल केंद्र की राजनीति में नहीं भेजा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, मुकेश रोशन ने यह भी सुझाव दिया है कि नीतीश कुमार को कृषि और रेलवे जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार सौंपा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि बिहार का कोई नेता इस उच्च पद पर बैठता है, तो यह पूरे राज्य के लिए गर्व की बात होगी।
जेडीयू की नई रणनीति
पहले आरजेडी इस मांग का समर्थन कर रही थी, लेकिन अब जेडीयू विधायक के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर भी इस विचार पर चर्चा शुरू हो गई है। जेडीयू अब नीतीश कुमार के '20 वर्षों के सुशासन' और 'केंद्रीय अनुभव' को राष्ट्रीय स्तर पर भुनाने की योजना बना रही है। यदि नीतीश कुमार दिल्ली की ओर बढ़ते हैं, तो पटना की गद्दी पर कौन बैठेगा? यह एक मांग बिहार में भविष्य के गठबंधनों और नेतृत्व परिवर्तन के कई दरवाजे खोल सकती है।