बिहार में जहरीली शराब से पिता की मौत, बेटे की आंखों की रोशनी गई
बिहार में शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब का मामला
बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी के बावजूद, शराब माफिया बेखौफ होकर कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हाल ही में समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में जहरीली शराब के सेवन से एक परिवार की खुशियां पल भर में बिखर गईं। नए साल के जश्न के दौरान शराब पीने से एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि उसके बेटे की आंखों की रोशनी चली गई।
सूत्रों के अनुसार, पिता और पुत्र ने नए साल की खुशी में रात को शराब का सेवन किया। कुछ समय बाद पिता की तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने मुसरीघरारी पुलिस को घटना की सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब ग्रामीणों ने नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी से अपील की है कि वे जहरीली शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता अभियान चलाएं।
प्रशासन की जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीपीओ-1 संजय कुमार पांडे और सदर एसडीओ दिलीप कुमार ने मुसरीघरारी थाना का दौरा किया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर विसरा सुरक्षित रख लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।
शराबबंदी की वास्तविकता पर सवाल
यह घटना बिहार में शराबबंदी की प्रभावशीलता पर फिर से सवाल उठाती है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से माफिया आसानी से शराब उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार और पुलिस के सख्त निर्देशों के बावजूद, शराब तस्करों का हौसला बढ़ा हुआ है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि अगर शराबबंदी प्रभावी है, तो माफियाओं तक शराब कैसे पहुंच रही है? पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।