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बिहार में किरायानामा निबंधन की बढ़ती जागरूकता

बिहार में किरायानामा निबंधन के प्रति जागरूकता में तेजी आई है, जिसमें 2018 से 2025 के बीच 4,811 लोगों ने निबंधन कराया। व्यावसायिक भवनों का किरायानामा आवासीय भवनों की तुलना में अधिक है। निबंधन अधिनियम के तहत यह प्रक्रिया अनिवार्य है, जो दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करती है। इसके अलावा, निबंधित किरायानामा पर स्टाम्प शुल्क में छूट भी दी जाती है। जानें इस प्रक्रिया के सभी पहलुओं के बारे में।
 

किरायानामा निबंधन में वृद्धि

बिहार में किरायानामा निबंधन के प्रति लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। यह मकान मालिक और किरायेदार के बीच कानूनी समझौते के लिए आवश्यक है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अनुसार, 2018 से 2025 के बीच 4,811 व्यक्तियों ने किरायानामा निबंधित कराया है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में सबसे अधिक 842 लोगों ने निबंधन कराया है। 


व्यावसायिक भवनों का किरायानामा अधिक

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, किरायानामा सभी प्रकार के आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक भवनों के लिए किया जाता है। हालांकि, राज्य में व्यावसायिक भवनों का किरायानामा आवासीय भवनों की तुलना में अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, 2018 में 643, 2019 में 678, 2020 में 266, 2021 में 430, 2022 में 702, 2023 में 842, 2024 में 607 और 2025 में अब तक 643 किरायानामा दस्तावेजों का निबंधन हुआ है। 


किरायानामा के लाभ

निबंधन अधिनियम के तहत किराए पर दी जाने वाली संपत्ति का निबंधन अनिवार्य है। यह मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हितों की सुरक्षा करता है। किरायानामा में उल्लिखित शर्तों का उल्लंघन किरायेदार नहीं कर सकता। यदि ऐसा होता है, तो किरायानामा को मकान मालिक, किरायेदार या दोनों की सहमति से रद्द किया जा सकता है। 


स्टाम्प शुल्क में छूट

निबंधित किरायानामा एक प्रमाणित दस्तावेज के रूप में मान्य होता है। इसके लिए सरकार किराए के मूल्य का केवल 0.5 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लेती है। यह सुविधा सभी जिलों के निबंधन कार्यालयों में और ऑनलाइन उपलब्ध है। निबंधन के लिए मकान मालिक और किरायेदार दोनों के आधार कार्ड या वोटर आईडी और फोटो अनिवार्य हैं।