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बिहार का माता नेतुला मंदिर: आस्था और चमत्कारों का केंद्र

बिहार के जमुई में स्थित माता नेतुला मंदिर भक्तों के लिए एक चमत्कारी स्थल है। यहां 30 दिनों तक धरना देने वाले भक्तों की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है, जहां भगवान महावीर ने ज्ञान की खोज में विश्राम किया था। जानें इस मंदिर की विशेषताएँ और भक्तों की आस्था के बारे में।
 

माता नेतुला मंदिर की विशेषताएँ


भारत में अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनमें से हर एक का अपना विशेष महत्व है। भक्त अक्सर इन स्थानों पर जाकर अपनी समस्याओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन मंदिरों में चमत्कार होते हैं, जो लोगों की गहरी आस्था को दर्शाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां 30 दिनों तक धरना देने वाले भक्तों की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।


यह मंदिर बिहार के जमुई में स्थित है, जो जमुई रेलवे स्टेशन के सामने मलयपुर में है। इसे जमुई का गौरव माना जाता है और इसे काली माता का मंदिर या माँ नेतुला मंदिर के नाम से जाना जाता है।


माता नेतुला के चमत्कार


कहा जाता है कि जो भक्त आंखों की समस्याओं से ग्रसित होते हैं, यदि वे माता नेतुला के दरबार में आते हैं, तो उनकी सभी परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आते हैं। जो भक्त सच्चे मन से 30 दिनों तक धरना देते हैं, उनकी इच्छाएँ पूरी होती हैं।


मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

माता नेतुला मंदिर का इतिहास



इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। कहा जाता है कि जब भगवान महावीर ज्ञान की खोज में निकले थे, तब उन्होंने पहले दिन माता नेतुला मंदिर के परिसर में स्थित वटवृक्ष के नीचे विश्राम किया था। जैन धर्म के ग्रंथ कल्पसूत्र में भी इस घटना का उल्लेख है।


मंदिर में हर दिन भक्तों की भीड़ लगी रहती है, विशेषकर मंगलवार को। नवरात्रि के दौरान माता की विशेष पूजा की जाती है। जब भक्तों की इच्छाएँ पूरी होती हैं, तो वे सोने या चांदी की आंखें चढ़ाते हैं। यह मंदिर नेत्र रोगों से परेशान लोगों के लिए एक विशेष स्थान है।


आस्था का केंद्र

भारत में कई मंदिर हैं, लेकिन माता नेतुला मंदिर की विशेषताएँ इसे अलग बनाती हैं। लोग यहां अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते हैं और भगवान की कृपा से उनकी सभी परेशानियाँ दूर हो जाती हैं।