बाराबंकी से बहराइच तक छह लेन राजमार्ग परियोजना में देरी का सामना
बाराबंकी से बहराइच के बीच प्रस्तावित छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन वन विभाग की अनुमति में देरी के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इस परियोजना का महत्व केवल दो जिलों को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेपाल के साथ व्यापार को भी बढ़ावा देगी। हालांकि, वन विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण के बीच चल रही प्रक्रिया के कारण परियोजना में देरी की आशंका है। क्या यह महत्वाकांक्षी परियोजना समय पर पूरी होगी? जानें पूरी जानकारी में।
Apr 30, 2026, 22:27 IST
राजमार्ग परियोजना की मंजूरी और वन विभाग की अनुमति
बाराबंकी और बहराइच के बीच प्रस्तावित छह लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग कैबिनेट द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है, लेकिन इसके निर्माण कार्य की शुरुआत के लिए वन विभाग की अनुमति का इंतजार किया जा रहा है।
यह परियोजना अक्टूबर 2026 में शुरू होने की योजना के साथ तैयार की गई थी, लेकिन जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कई बार पत्राचार के बावजूद वन विभाग से अंतिम अनुमति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार, यह राजमार्ग एक संरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसमें लगभग 70 हेक्टेयर भूमि शामिल है।
मार्ग का विवरण और वन विभाग की चिंताएं
यह मार्ग मुस्ताफाबाद से कैसरगंज होते हुए बहराइच तक जाएगा। वन विभाग का कहना है कि मौजूदा योजना में लगभग 9,000 पेड़ प्रभावित होंगे, जिन्हें काटना पड़ेगा। इसी कारण विभाग ने मार्ग में बदलाव का सुझाव दिया है।
हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का तर्क है कि इस योजना को पहले ही उच्च स्तर से मंजूरी मिल चुकी है। यदि इसमें बदलाव किया गया, तो सड़क शहर के भीतर से गुजरेगी, जिससे सैकड़ों मकानों को हटाना पड़ेगा और परियोजना की लागत में भारी वृद्धि होगी।
परियोजना की लागत और पौधारोपण का प्रस्ताव
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 6,969 करोड़ रुपये है, जिसमें निर्माण कार्य पर लगभग 3,485 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण पर करीब 1,574 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत बनाई जाएगी, जिससे निजी और सरकारी साझेदारी के माध्यम से कार्य पूरा किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, वन क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए दस गुना अधिक पौधारोपण का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित भूमि के लिए मुआवजा भी प्रदान किया जाएगा। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल लगभग 35,000 पेड़-पौधे हैं, जिनमें लगभग 9,300 बड़े पेड़ शामिल हैं।
परियोजना का महत्व और व्यापारिक संभावनाएं
यह परियोजना केवल दो जिलों को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेपाल सीमा से जुड़े व्यापार को भी बढ़ावा देगी। रूपईडीहा के माध्यम से भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, यह राजमार्ग पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। कतर्निया घाट, दुधवा और सोहेलवा जैसे वन पर्यटन स्थलों, अयोध्या धाम, देवीपाटन धाम और श्रावस्ती जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। लखनऊ से बहराइच की दूरी भी लगभग डेढ़ घंटे में तय की जा सकेगी।
परियोजना में देरी की आशंका
हालांकि, वन विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण के बीच चल रही प्रक्रिया के कारण परियोजना की शुरुआत में देरी की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य स्तर पर फाइल लंबित है और केंद्र सरकार को स्थिति से अवगत कराया गया है।
इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वन अनुमति और भूमि अधिग्रहण में देरी जारी रहती है, तो क्या यह महत्वाकांक्षी परियोजना निर्धारित समय पर पूरी हो पाएगी या नहीं, यह भविष्य में ही स्पष्ट होगा।