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बाराबंकी में महिला महाविद्यालय के वित्तीय घोटाले में 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

बाराबंकी जिले में मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला महाविद्यालय के संचालन से जुड़े एक वित्तीय घोटाले में अदालत के आदेश पर 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि प्रबंध समिति के अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से संस्थान के 2.7 करोड़ रुपये का गबन किया। इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, जबकि आरोपियों ने अनियमितताओं से इनकार किया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
 

महाविद्यालय में वित्तीय अनियमितता का मामला

बाराबंकी जिले के कोतवाली क्षेत्र में स्थित मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला महाविद्यालय के संचालन से जुड़े एक कथित वित्तीय घोटाले के सिलसिले में पुलिस ने अदालत के निर्देश पर 10 व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।


नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने जानकारी दी कि अदालत के आदेश पर उमाशंकर वर्मा, धीरेंद्र कुमार, मानव पटेल, मान सिंह, राजेश कुमार, राजीव, अशोक, सुनील, अजय और भागवत नामक आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।


पुलिस के अनुसार, महाविद्यालय की संस्थापक संरक्षक कृष्णा चौधरी ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर संस्थान के लगभग 2.7 करोड़ रुपये का गबन किया है।


कृष्णा चौधरी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उमाशंकर वर्मा और सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बिना वैध प्रक्रिया के चुनाव कराकर खुद को संस्थान का अधिकारी घोषित किया।


वादी के अनुसार, पांच अप्रैल 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान फर्जी तरीके से प्रबंध समिति की बैठक आयोजित कर 17 लोगों के जाली हस्ताक्षर किए गए। इसके आधार पर, राष्ट्रीयकृत बैंक और जिला सहकारी बैंक में संस्थान का खाता संचालित कर लगभग 50 लाख रुपये दयाराम एंड संस ट्रेडिंग फर्म को बिना किसी बिल के आरटीजीएस के माध्यम से भेज दिए गए।


आरोप है कि उमाशंकर वर्मा ने अपने पुत्र मानव पटेल के खाते में बिना प्रबंध कार्यकारिणी की अनुमति के 20 लाख रुपये स्थानांतरित किए। इस दौरान धीरेंद्र कुमार वर्मा के जिला सहकारी बैंक के नामित चेयरमैन होने का लाभ उठाने का भी आरोप लगाया गया है।


कृष्णा चौधरी ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उन्होंने पहले भी इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की थी और 25 सितंबर 2025 को पुनः प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में अदालत ने आवेदन पर सुनवाई कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इस बीच, उमाशंकर वर्मा ने कहा कि संस्था में कोई अनियमितता नहीं है।