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बांग्लादेश में मंदिर के केयरटेकर की हत्या: लापता नयन दास का शव मिला

बांग्लादेश में तीन दिन से लापता मंदिर के केयरटेकर नयन दास का शव एक पेड़ से लटका मिला है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि स्थानीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। नयन की गुमशुदगी की रिपोर्ट 20 अप्रैल को दर्ज की गई थी, और शव मिलने के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। यह घटना बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा का एक नया उदाहरण है।
 

बांग्लादेश में नयन दास का शव पेड़ से लटका मिला

बांग्लादेश में तीन दिन से लापता मंदिर के केयरटेकर, नयन दास, का शव एक पेड़ से लटका हुआ पाया गया। 35 वर्षीय नयन सतकानिया का निवासी था और खुरुश्कुल यूनियन के पुलिश्शोरा घोना नाग पंचमी मंदिर में कार्यरत था। स्थानीय लोगों और पुलिस के अनुसार, रविवार रात लगभग 9 बजे कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने नयन को उनके घर से बुलाया और उसके बाद वह गायब हो गए। परिवार ने उनकी खोज में हर संभव प्रयास किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।


गुमशुदगी की रिपोर्ट और खोजबीन

20 अप्रैल की रात को कॉक्स बाजार सदर मॉडल पुलिस स्टेशन में नयन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद से स्थानीय लोग उनकी तलाश में जुट गए। बुधवार दोपहर, लगभग 30 से 35 लोगों का एक समूह मंदिर के निकट पहाड़ी क्षेत्र में खोजबीन कर रहा था, तभी उन्हें एक पेड़ से लटका हुआ शव मिला। यह घटना बांग्लादेश में तारिक रहमान सरकार के गठन के बाद हिंदू समुदाय से जुड़े किसी व्यक्ति की पहली हत्या मानी जा रही है।


शव पर चोट के निशान

नयन दास का शव मिलने के बाद पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारा, जिसमें गले पर कपड़ा लिपटा हुआ था। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए कॉक्स बाजार जनरल अस्पताल भेजा गया। पुलिस अधिकारी मोहम्मद सामीउद्दीन ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह हत्या है या आत्महत्या।


हत्या की आशंका

हालांकि, मंदिर से जुड़े एक व्यक्ति ने संदेह व्यक्त किया है कि नयन दास की पहले हत्या की गई और फिर शव को पेड़ से लटका दिया गया। उनके अनुसार, गले पर चोट के निशान भी थे। कॉक्स बाजार पूजा उद्जापन परिषद के महासचिव जॉनी धर ने बताया कि 19 अप्रैल को कुछ लोग नयन को घर से बुलाकर ले गए थे और वह वापस नहीं लौटे।


बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा

इस समय पुलिस मामले की जांच कर रही है। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच, कम से कम 15 हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) के अनुसार, अगस्त 2024 से नवंबर 2024 के बीच लगभग 82 हिंदुओं की हत्या हुई।