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बछेंद्री पाल का 72वां जन्मदिन: पर्वतारोहण की पहली महिला नायक

आज, 24 मई को, बछेंद्री पाल, जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली पहली महिला हैं, अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं। उनके जीवन की कहानी प्रेरणादायक है, जिसमें उन्होंने अपने परिवार की इच्छाओं के खिलाफ जाकर पर्वतारोहण का सपना पूरा किया। जानें उनके संघर्ष, उपलब्धियों और ऐतिहासिक चढ़ाई के बारे में।
 

महान पर्वतारोही का जन्मदिन

आज, 24 मई को, बछेंद्री पाल, जो भारतीय महिला पर्वतारोही हैं, अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं। वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली पहली महिला हैं, जिन्होंने तिरंगा फहराया। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने कठिन परिश्रम किया। उनके परिवार ने कभी नहीं चाहा कि वह पर्वतारोही बनें, लेकिन बचपन से ही उन्हें पहाड़ों और साहसिक गतिविधियों का शौक था। उन्होंने अपने सपने को साकार कर इतिहास रचा और देश का मान बढ़ाया। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं।


परिवार और प्रारंभिक जीवन

बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को उत्तरांचल के गढ़वाल जिले के छोटे से गांव नकुरी में हुआ। उनके पिता का नाम किशनपाल सिंह और मां का नाम हंसा देवी था। उनके पिता एक साधारण व्यापारी थे। बछेंद्री बचपन से ही पढ़ाई और खेल में अव्‍वल थीं। एक बार स्कूल की पिकनिक के दौरान उन्होंने 13,000 फीट की ऊंचाई पर चढ़ाई की, जिससे उन्हें पर्वतारोहण का शौक लग गया।


पर्वतारोहण की यात्रा की शुरुआत

आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और स्नातक की डिग्री हासिल की। वह अपने गांव की पहली महिला थीं जिन्होंने ग्रेजुएशन किया। बछेंद्री का सपना हमेशा से पर्वतारोही बनने का था। स्नातक के बाद उन्होंने संस्कृत में पोस्टग्रेजुएशन किया और फिर बीएड की डिग्री प्राप्त की। हालांकि, उनके परिवार ने कभी नहीं चाहा कि वह पर्वतारोही बनें, लेकिन उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिला लिया।


इतिहास रचने का क्षण

1984 में, माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए एक अभियान दल का गठन किया गया, जिसका नाम एवरेस्ट 84 था। इस दल में बछेंद्री पाल के साथ 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल थीं। कड़ी ट्रेनिंग के बाद, मई 1984 में उनका दल अभियान पर निकला। तूफान, खराब मौसम और कठिन चढ़ाई का सामना करते हुए, बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को एवरेस्ट पर चढ़ाई कर इतिहास रच दिया।