बकरीद पर मवेशियों की कुर्बानी पर कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला
कलकत्ता हाई कोर्ट का निर्णय
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बकरीद के अवसर पर मवेशियों की कुर्बानी को लेकर धार्मिक छूट देने से इनकार कर दिया है। इस निर्णय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। राज्य के मुस्लिम नेताओं ने इस कानूनी रोक पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बकरीद के लिए कानूनी और राजनीतिक विवाद
बकरीद का त्योहार नजदीक है, लेकिन पश्चिम बंगाल में मवेशियों की कुर्बानी को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में एक ऐसा निर्णय सुनाया है जिसने पूरे राज्य में नई चर्चाएँ शुरू कर दी हैं।
अदालत ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिनमें धार्मिक आधार पर भैंस, बैल और अन्य मवेशियों की कुर्बानी की अनुमति मांगी गई थी।
सियासी घमासान का कारण
हाई कोर्ट ने मवेशियों की कुर्बानी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि धार्मिक आधार पर कोई विशेष छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 का हवाला देते हुए भैंस और बैल जैसे मवेशियों की कुर्बानी की मांग को खारिज कर दिया है।
हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को एक विकल्प भी दिया है। हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 27 और 28 मई को बकरीद के अवसर पर केवल 24 घंटे के भीतर इस बात पर विचार करे कि क्या किसी प्रकार की छूट देना आवश्यक है या नहीं। इस निर्णय ने त्योहार की तैयारियों में जुटे लोगों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
सरकार के दिशा-निर्देश
अदालती आदेश के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले ही कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे। सरकार की एक अधिसूचना के अनुसार, अब बिना 'स्वास्थ्य प्रमाणपत्र' प्राप्त किए किसी भी पशु का वध करना गैरकानूनी माना जाएगा। इसके लिए पशुपालकों और कुर्बानी देने वालों को संबंधित अधिकारियों से फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इन नियमों ने आम जनता के लिए त्योहार की रस्मों को निभाने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक जटिल बना दिया है।
परंपरा पर खतरा
इस कानूनी रोक और सरकारी कड़ाई पर राज्य के मुस्लिम नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए इसे सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया भर के मुसलमान पिछले 1400 सालों से अल्लाह को खुश करने के लिए कुर्बानी देते आ रहे हैं और यह कुरान का सीधा निर्देश है।
कबीर ने केंद्र सरकार के दोहरे मापदंडों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब दिल्ली में भैंस और अन्य मवेशियों के वध से जुड़े मांस के निर्यात और आयात की अनुमति दी जा रही है, तो बंगाल में इस तरह की रोक क्यों लगाई जा रही है? उन्होंने यह भी कहा कि अगर वध पर रोक लगानी है, तो इससे संबंधित सभी व्यावसायिक लाइसेंस भी रद्द किए जाने चाहिए।