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बंबई उच्च न्यायालय ने एफडीए को दी फटकार, सरकारी कैंटीनों पर कार्रवाई की आवश्यकता

बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को सरकारी कैंटीनों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। अदालत ने एफडीए की भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रालय की कैंटीनों में गंदगी और कीड़े पाए गए हैं, जबकि निजी रेस्तरां पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। उच्च न्यायालय ने एफडीए को निर्देश दिया कि वह सभी संस्थानों के खिलाफ समान और निष्पक्ष रवैया अपनाए। मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।
 

बंबई उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी

बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को शहर के रेस्तरां और होटलों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई के लिए चेतावनी दी। अदालत ने निर्देश दिया कि मंत्रालय की कैंटीनों को सुधारात्मक नोटिस जारी किया जाए, क्योंकि वकीलों की एक समिति की जांच में वहां गंदगी और कीड़े पाए गए थे। अदालत ने कहा कि एफडीए सरकारी कैंटीनों को बिना किसी कार्रवाई के ‘क्लीन चिट’ दे रहा है, जबकि निजी होटल, रेस्तरां और भोजनालयों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है।


वकीलों की समिति की रिपोर्ट

उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त चार वकीलों की समिति ने राज्य सचिवालय के अंदर तीन कैंटीनों का निरीक्षण किया और एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में कहा गया कि कैंटीनें साफ-सुथरी नहीं थीं, वहां सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम टूटा हुआ था, और किचन के फर्श पर कॉकरोच और मक्खियां थीं। यह रिपोर्ट एफडीए द्वारा प्रस्तुत उस रिपोर्ट के विपरीत थी, जिसमें कहा गया था कि मंत्रालय की कैंटीन नियमों का 98 प्रतिशत पालन कर रही थीं।


निष्पक्षता की आवश्यकता

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कहा कि एफडीए को होटलों और रेस्तरां (सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की कैंटीन सहित) के खिलाफ अपनी कार्रवाई में ‘निष्पक्ष, भेदभाव रहित और समान रवैया’ अपनाने की आवश्यकता है। अदालत ने मंत्रालय की कैंटीन को दिए गए ‘98 प्रतिशत स्वच्छता’ प्रमाणपत्र पर सवाल उठाया। समिति द्वारा प्रस्तुत कैंटीन की तस्वीरें देखने के बाद पीठ ने हैरानी जताई और कहा कि एफडीए को मंत्रालय की कैंटीन को भी नोटिस जारी करना चाहिए।


पूर्णिमा रेस्तरां का मामला

अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एफडीए ने दक्षिण मुंबई के पूर्णिमा रेस्तरां को निलंबन नोटिस जारी किया था, जबकि मंत्रालय की कैंटीन को नियमों का 98 प्रतिशत पालन करने वाला बताया गया था। पूर्णिमा रेस्तरां के वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि एफडीए ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना ‘निलंबन नोटिस’ जारी किया था। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘तो फिर मंत्रालय की (कैंटीन) का लाइसेंस भी निलंबित करें।


अगली सुनवाई और आदेश

उच्च न्यायालय ने इसे मान लिया और कहा कि पूर्णिमा रेस्तरां को जारी निलंबन नोटिस को ‘कारण बताओ सुधार नोटिस’ में बदल दिया जाएगा और मंत्रालय की तीन कैंटीनों को भी ऐसे ही नोटिस जारी किए जाएंगे। अदालत ने कहा, ‘‘इन जगहों को मंगलवार तक का समय दिया जाएगा और बुधवार को एफडीए द्वारा फिर से जांच की जाएगी।’’


एफडीए की कार्रवाई पर सवाल

पीठ ने एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे को आदेश दिया कि वे उन रिपोर्टों की समीक्षा करें जिनमें मंत्रालय की कैंटीन द्वारा 98 प्रतिशत नियमों का पालन करने की बात कही गई थी, और ‘झूठ बोलने’ के लिए उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा। पीठ ने कहा कि एफडीए और उसके कमिश्नर मुंडे जो काम कर रहे हैं, वह तारीफ के काबिल है, लेकिन एजेंसी को निष्पक्ष भी रहना चाहिए।


अंतिम टिप्पणियाँ

अदालत ने एफडीए से उन हालात और पैमानों के बारे में जानकारी मांगी, जिनके आधार पर कुछ खाने-पीने की जगहों को सुधारात्मक नोटिस जारी किए गए, जबकि कुछ अन्य को सीधे निलंबन के नोटिस दिए गए। अदालत ने कहा, ‘‘हमें मंत्रालय की कैंटीन की वे तस्वीरें और वीडियो दिखाएं, जो निरीक्षण के समय ली गई थीं।’’