फॉसिल्स की पहचान के लिए अनोखी तकनीक: जीभ से चाटकर जानें
प्राचीन जीवों के रहस्यों का पता लगाने की विधि
हमारी धरती का इतिहास लाखों वर्षों पुराना है। प्राचीन काल में क्या हुआ, इसका कुछ ज्ञान हमें जीवाश्मों के माध्यम से मिलता है। डायनासोर जैसे जीवों का अस्तित्व कभी देखा नहीं गया, लेकिन उनके होने का विश्वास है। कई अन्य प्राचीन सभ्यताएं और जीव भी अब विलुप्त हो चुके हैं, जिनके प्रमाण हमें जीवाश्मों के रूप में मिलते हैं।
जीवाश्म वे निशान होते हैं जो सैकड़ों वर्षों तक चट्टानों के नीचे दबे रहते हैं। जब पुरातत्वविद खुदाई करते हैं, तो उन्हें ऐसे पत्थर मिलते हैं जिन पर किसी प्रकार का प्रिंट होता है। ये आम पत्थर की तरह दिखते हैं, लेकिन विशेषज्ञ उनकी पहचान करते हैं। इसके लिए एक अनोखी तकनीक का उपयोग किया जाता है।
जीभ से पहचानने की विधि
पुरातत्वविद कई महीनों तक खुदाई करते हैं और जब उन्हें लगता है कि उन्हें एक मूल्यवान जीवाश्म मिला है, तो वे उसे पहचानने के लिए जीभ से चाटते हैं। यदि वह सामान्य पत्थर है, तो जीभ आसानी से उस पर सरक जाती है, लेकिन यदि वह जीवाश्म है, तो वह थूक को सोख लेता है और ऐसा लगता है कि पत्थर जीभ को खींच रहा है।
महत्वपूर्ण तकनीक
खुदाई के दौरान कई नमूनों को परीक्षण के लिए उठाया जाता है, जिसमें काफी खर्च होता है। इसलिए विशेषज्ञ केवल महत्वपूर्ण चीजें ही अपने साथ ले जाना चाहते हैं। पत्थर और जीवाश्म के समान दिखने के कारण, जीभ से चाटकर परीक्षण किया जाता है ताकि बेकार चीजें अपने साथ न ले जाएं। इस तकनीक से कई महत्वपूर्ण जीवाश्म खोजे गए हैं, जिन्होंने मानव सभ्यता के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है।