×

फाल्टा उपचुनाव में भाजपा की जीत पर राजनीतिक विवाद छिड़ा

पश्चिम बंगाल के फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के देबांशु पांडा की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें मतगणना में विसंगतियों और अन्य दलों के एजेंटों को बाहर निकालने का आरोप शामिल है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
 

फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की जीत

21 मई को पश्चिम बंगाल के फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान के परिणामों के बाद भाजपा के देबांशु पांडा ने एक बड़ी जीत हासिल की। पांडा ने 1 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की, जबकि सीपीआई (एम) के शंभू नाथ कुर्मी को 40,645 वोट मिले और कांग्रेस के अब्दुल रज्जाक मोल्ला को केवल 10,084 वोट मिले। यह स्थिति तब बनी जब टीएमसी के उम्मीदवार ने चुनाव से पहले ही अपना नाम वापस ले लिया था।


टीएमसी का चुनाव आयोग पर आरोप

परिणामों की घोषणा के बाद, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग से मतगणना के समय को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि 4 मई को जब विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हुए, तब दोपहर 3:30 बजे तक केवल 2-4 दौर की मतगणना पूरी हुई थी, जबकि फाल्टा में उसी समय तक सभी 21 दौर पूरे हो चुके थे।


फाल्टा में विसंगतियों का आरोप

उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा कि फाल्टा में पुनर्मतगणना के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके अलावा, आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई।


चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस स्थिति पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि सीईओ को नई पश्चिम बंगाल सरकार में मुख्य सचिव नियुक्त किया गया, जबकि फाल्टा में मतदान प्रक्रिया अभी भी चल रही थी।


अन्य दलों के एजेंटों को बाहर निकालने का आरोप

उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल और भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों के मतगणना एजेंटों को 4 मई को भारतीय चुनाव आयोग के अधिकारियों द्वारा स्थल से बाहर निकाला गया। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के सिद्धांतों पर सीधा हमला है।