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फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली की मांग की

फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से वादे पूरे करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही कभी भी लोकतांत्रिक सरकार का विकल्प नहीं हो सकती। उनका यह बयान 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से क्षेत्रीय पार्टियों की लगातार उठाई जा रही मांग का हिस्सा है। अब्दुल्ला ने केंद्र से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और निर्वाचित सरकार को अधिकार लौटाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
 

राज्य दर्जे की बहाली पर सवाल उठाते हुए

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा पुनः बहाल करने में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह केंद्रशासित प्रदेश के निवासियों से किए गए वादों को पूरा करे।


अनंतनाग में एक सभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोगों ने काफी समय तक इंतजार किया है। अब उन वादों को लागू किया जाना चाहिए।”


नौकरशाही और लोकतांत्रिक सरकार

उन्होंने संसद और उच्चतम न्यायालय में दिए गए आश्वासनों के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही निरंतर देरी पर सवाल उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 2018 से 2024 के बीच का समय यह दर्शाता है कि नौकरशाही कभी भी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार का विकल्प नहीं हो सकती, जो जनता की आकांक्षाओं और चिंताओं से गहराई से जुड़ी होती है।


अब्दुल्ला ने कहा, “नई दिल्ली को जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा देना चाहिए और निर्वाचित सरकार को सभी अधिकार लौटाने चाहिए, ताकि शासन अधिक जवाबदेह और जनकेंद्रित हो सके।”


शासन मॉडल पर आलोचना

फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों के शासन मॉडल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि 2018 से 2024 के बीच का समय इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि एक नौकरशाही व्यवस्था कभी भी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार की जगह नहीं ले सकती।


मुख्य बिंदु

जनता से जुड़ाव की कमी: एक चुनी हुई सरकार लोगों की आकांक्षाओं और रोजमर्रा की समस्याओं से गहराई से जुड़ी होती है, जो नौकरशाही में संभव नहीं है।


अधिकारों की वापसी: शासन को अधिक जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने के लिए निर्वाचित सरकार को उसके सभी अधिकार लौटाने चाहिए।


अनुच्छेद 370 का प्रभाव

यह ध्यान देने योग्य है कि 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था और इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया था। इसके बाद से क्षेत्रीय पार्टियां पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रही हैं। फारूक अब्दुल्ला का यह बयान इसी संघर्ष की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।