फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर जताई शांति की उम्मीद
अब्दुल्ला की शांति की आशा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद पश्चिम एशिया में शांति जल्द स्थापित होगी। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष का समाधान केवल संवाद के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा, "मैं अल्लाह का आभार व्यक्त करता हूँ कि उसने अमेरिका और ईरान को बातचीत के लिए प्रेरित किया। युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। हमारे पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हमें नहीं पता कि शांति लौटने में कितना समय लगेगा।"
ऊर्जा संसाधनों का महत्व
अब्दुल्ला ने इस संघर्ष के कारण जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी उजागर किया, जिनका जीवन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि भारत इस युद्ध को समाप्त करने में मदद करेगा। पश्चिम एशिया में काम करने वाले कई लोग अपने घर पैसे भेजते हैं। मुझे विश्वास है कि भारत इसमें सहायता करेगा। हम अमेरिका के मित्र हैं।"
फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत का रुख
फारूक अब्दुल्ला ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के रुख में आए अचानक बदलाव की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हम लंबे समय से फिलिस्तीन के मुद्दे का समर्थन करते आ रहे हैं, क्योंकि यह एक न्यायपूर्ण मामला है। अचानक हमारा रुख बदलना हमारे देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है।" यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य बमबारी अभियान को निलंबित करने और ईरान द्वारा स्वीकार किए गए 10 सूत्री प्रस्ताव पर आधारित युद्धविराम की घोषणा के बाद आई।
वैश्विक नेताओं की चिंता
हालांकि यह युद्धविराम अस्थायी है, वैश्विक नेताओं ने तनाव को बढ़ने से रोकने और आर्थिक तथा सुरक्षा जोखिमों को कम करने के लिए निरंतर राजनयिक बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि 10 सूत्री प्रस्ताव स्थायी समझौते की बातचीत का आधार बनेगा और यह भी बताया कि अमेरिका ने अपने अधिकांश सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर लिया है।