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फरीदाबाद में 90 लोगों का परिवार: एक अद्भुत जीवनशैली

फरीदाबाद के पलवली गांव में भारद्वाज परिवार की कहानी अद्भुत है, जहां 90 लोग एक ही घर में रहते हैं। इस परिवार का मुखिया 93 वर्षीय छज्जूराम है, जो अपने परिवार को एकजुट रखने में सफल रहे हैं। परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद होने पर वोटिंग के जरिए समाधान किया जाता है। जानें कैसे यह परिवार अपने खर्च को चलाता है और चुनावों में राजनीतिक दलों पर अपना प्रभाव डालता है।
 

एक ही घर में चार पीढ़ियों का निवास


फरीदाबाद के पलवली गांव में भारद्वाज परिवार की कहानी सुनकर आपको राजपाल यादव का एक प्रसिद्ध डायलॉग याद आ जाएगा, जिसमें वह कहते हैं कि 'इसे घर क्यों कहते हैं, जिला घोषित क्यों नहीं कर देते?' इस परिवार में चार पीढ़ियों के 90 सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं। जब आजकल एक ही पीढ़ी के भाई भी घर का बंटवारा चाहते हैं, तब यह परिवार एक मिसाल बनकर उभरता है।


समस्याओं का समाधान वोटिंग के जरिए

इस परिवार के मुखिया 93 वर्षीय छज्जूराम हैं, जिन्होंने अपने परिवार को एकजुट रखा है। इस विशाल परिवार के लिए 10 चूल्हों पर खाना पकता है। परिवार में मतभेद होने पर, सभी सदस्य वोटिंग के जरिए समस्या का समाधान करते हैं। यह एक अनोखा और प्रभावी तरीका है।


परिवार का खर्च कैसे चलता है?

इतने बड़े परिवार का खर्च चलाने के लिए हर सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देता है। कुछ सदस्य व्यवसाय में हैं, कुछ सरकारी नौकरी कर रहे हैं, और कुछ कृषि में लगे हुए हैं। परिवार की बेटी रजनी भारद्वाज एक आईएएस अधिकारी हैं, जबकि बेटे दीपक और प्रशांत भारद्वाज सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं।


राजनीतिक प्रभाव

इस परिवार के 90 सदस्यों के कारण, चुनाव के समय राजनीतिक दल उनके घर पर वोट मांगने आते हैं। सभी मानते हैं कि जिस उम्मीदवार को यह परिवार वोट देगा, वही जीत सकता है। परिवार के मुखिया छज्जूराम ने राजनीति में कई साल बिताए हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा परिवार को प्राथमिकता दी।