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फतेहपुर में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी करने वाली शिक्षिका निलंबित

फतेहपुर जिले में सहायक अध्यापक सुषमा देवी पर फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी करने का आरोप लगा है। एसटीएफ की जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपनी जन्मतिथि में बदलाव कर नौकरी हासिल की। यह मामला शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाता है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और विभागीय कार्रवाई के बारे में।
 

फतेहपुर में फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला


फतेहपुर जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें सहायक अध्यापक सुषमा देवी पर फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के माध्यम से नौकरी प्राप्त करने का आरोप लगा है। खजुहा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में तैनात सुषमा देवी को एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दो बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देकर अपनी जन्मतिथि में बदलाव किया और इसी आधार पर नौकरी हासिल की। विभागीय जांच के बाद उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।


फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी प्राप्त करने का मामला

यह मामला शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। सुषमा देवी पर आरोप है कि उन्होंने लगभग एक दशक तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी की। एसटीएफ की रिपोर्ट ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जांच की शुरुआत तब हुई जब कानपुर के निवासी राजेंद्र पांडेय ने 2023 में शासन को शिकायत भेजी। शिकायत में कहा गया कि सुषमा देवी ने अपनी जन्मतिथि में बदलाव कर नौकरी प्राप्त की।


जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

शिकायत के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा और एसटीएफ को जांच का जिम्मा सौंपा गया। जांच में पाया गया कि सुषमा देवी ने दो बार परीक्षा दी थी और दोनों प्रमाणपत्रों में जन्मतिथि अलग-अलग थी।


एसटीएफ ने 15 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट फतेहपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपी, लेकिन विभाग ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की। अब जब मामला फिर से चर्चा में आया है, तो विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी।


निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया

बेसिक शिक्षा अधिकारी भारती त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि सुषमा देवी को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्तगी की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी।


यदि सभी आरोप सही पाए गए, तो शिक्षिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग अब पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है।