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फतेहपुर में प्रेम संबंधों के चलते हुई हत्या का सनसनीखेज खुलासा

फतेहपुर में विजय निषाद की हत्या का मामला प्रेम संबंधों के चलते हुआ है। उसकी प्रेमिका और पति ने मिलकर उसकी हत्या की और शव को ठिकाने लगाने के लिए खौफनाक तरीके अपनाए। पुलिस ने डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जानें इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी और कैसे पुलिस ने सच्चाई का खुलासा किया।
 

हत्या का मामला और उसके पीछे की कहानी


फतेहपुर के बकेवर क्षेत्र में विजय निषाद की हत्या का मामला अब एक चौंकाने वाली साजिश के रूप में सामने आया है। प्रेम संबंधों में उत्पन्न विवाद के चलते उसकी प्रेमिका और उसके पति ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव के हाथ-पैर काटकर कानपुर के जंगल में जला दिया गया। पुलिस की जांच में आरोपियों की यूट्यूब और गूगल सर्च हिस्ट्री ने इस मामले का राज खोल दिया।


विजय की लापता होने की कहानी

विजय निषाद, जो बकेवर थाना क्षेत्र के टिकरा गांव का निवासी था, 8 मई को घर से बाइक लेकर निकला था। उसके परिवार का कहना है कि वह हमीरपुर जिले के कुरारा थाना क्षेत्र के मनकी गांव गया था, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटा। कई दिनों की खोजबीन के बाद, परिवार ने 11 मई को बकेवर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।


प्रेम संबंधों का रहस्य

जांच के दौरान परिवार ने बताया कि विजय का एक विवाहित महिला से प्रेम संबंध था। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन की जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित हत्या थी।


विजय और किरन देवी के बीच लगभग आठ महीने से प्रेम संबंध थे। किरन का पति कामता निषाद, जो सूरत में काम करता था, चार महीने पहले गांव लौट आया। पति के लौटने के बाद किरन ने विजय से दूरी बनाने की कोशिश की, लेकिन विजय ने संपर्क बनाए रखा।


हत्या की योजना

8 मई को किरन ने विजय को अपने घर बुलाया। जब वह वहां पहुंचा, तो कमरे में पहले से मौजूद कामता ने उस पर हमला कर दिया। विजय की हत्या के बाद, दोनों ने सबूत मिटाने के लिए शव के हाथ-पैर काटे और उसे कानपुर के जंगल में जला दिया।


आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए ग्राइंडर और आरी ब्लेड का इस्तेमाल किया। इसके बाद शव को बोरे में भरकर जंगल में ले जाया गया।


डिजिटल सबूतों का खुलासा

पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने हत्या के बाद पुलिस को गुमराह करने की जानकारी खोजी थी।


इन डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद उन्होंने अपनी साजिश स्वीकार कर ली।


डीएनए जांच और पुलिस की उपलब्धि

पुलिस ने बताया कि बरामद कपड़ों और अन्य सामान की पहचान मृतक के परिजनों ने की है। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण कराया जा रहा है।


इस मामले में पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।