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फतेहपुर में नाला सफाई में भ्रष्टाचार का आरोप, सभासद ने की जांच की मांग

फतेहपुर नगर पालिका परिषद में नाला सफाई और सिल्ट निस्तारण के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। वार्ड नंबर-02 के सभासद दीपक कुमार मौर्य ने जिलाधिकारी को साक्ष्य सौंपते हुए कहा है कि कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने तकनीकी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कई अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
 

भ्रष्टाचार के आरोप


फतेहपुर नगर पालिका परिषद में नाला सफाई और सिल्ट निस्तारण के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। वार्ड नंबर-02 के सभासद दीपक कुमार मौर्य ने जिलाधिकारी को साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा है कि 5 लाख रुपये से अधिक की लागत से किया गया कार्य धरातल पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने इस मामले की तकनीकी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.


विवाद का कारण

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की सदर नगर पालिका परिषद में एक विकास कार्य को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। नाला सफाई और सिल्ट निस्तारण के लिए स्वीकृत बजट पर सवाल उठाते हुए सभासद दीपक कुमार मौर्य ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कागजों में कार्य पूरा दिखाया गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि नालों और तालाबों में गंदगी और जलभराव अभी भी मौजूद है।


स्वीकृत बजट का विवरण

5 लाख रुपये से अधिक की लागत से स्वीकृत हुई सफाई


सभासद दीपक कुमार मौर्य के अनुसार, सदर नगर पालिका परिषद ने अल्पकालिक ई-निविदा प्रक्रिया के तहत खलीलनगर क्षेत्र में नाला सफाई और सिल्ट निस्तारण का कार्य कराने के लिए 5,00,767 रुपये का बजट स्वीकृत किया था।


अनियमितताओं की शिकायत

शिकायत में गिनाईं मौके पर मिली अनियमितताएं


सभासद ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में कहा है कि संबंधित नाला और तालाब क्षेत्र में जलकुंभी, घास-फूस, प्लास्टिक कचरा और बड़ी मात्रा में सिल्ट जमा है। कई स्थानों पर पानी भरा हुआ है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि या तो कार्य अधूरा छोड़ा गया है या फिर केवल कागजी कार्रवाई की गई है।


स्वास्थ्य पर प्रभाव

गंदगी से बढ़ रहा बीमारी फैलने का खतरा


सभासद ने कहा कि नालों और तालाबों में जमा गंदगी के कारण आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही है। बरसात के मौसम में जलभराव और कूड़े-कचरे के चलते मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो सकता है।


भ्रष्टाचार की संभावना

भुगतान हुआ तो सीधे भ्रष्टाचार का मामला


दीपक कुमार मौर्य ने आरोप लगाया कि यदि संबंधित कार्य का भुगतान पहले ही कर दिया गया है, तो यह सीधे भ्रष्टाचार का मामला है। उनका कहना है कि बिना वास्तविक सफाई और सिल्ट निस्तारण के भुगतान किया जाना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।


जांच की मांग

डीएम से तकनीकी जांच और अभिलेखों की पड़ताल की मांग


सभासद ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाकर मौके का निरीक्षण कराया जाए। साथ ही कार्य से संबंधित फोटो, वीडियो, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख और सिल्ट निस्तारण स्थल से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन जांच की जाए।