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प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा स्थगित, भक्तों में चिंता का माहौल

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा को स्वास्थ्य कारणों से स्थगित कर दिया गया है, जिससे उनके अनुयायियों में चिंता का माहौल है। महाराज जी की किडनियों की स्थिति पिछले 20 वर्षों से खराब है और वे नियमित डायलिसिस पर हैं। इस बीच, मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने भावुकता से अंगदान का प्रस्ताव रखा, जिसे महाराज जी ने विनम्रता से ठुकरा दिया। जानें इस स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज की स्वास्थ्य स्थिति


मथुरा: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। उनके केली कुंज आश्रम के सेवादारों ने आधिकारिक रूप से यह जानकारी दी है कि महाराज जी की नियमित पदयात्रा को अगले आदेश तक रोक दिया गया है। इस खबर के बाद उनके अनुयायियों में चिंता की लहर दौड़ गई है, और वे लगातार उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।


आश्रम प्रबंधन के अनुसार, प्रेमानंद महाराज की केली कुंज से सौभरी कुंड तक की नियमित पदयात्रा को तुरंत प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। इसके साथ ही, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आयोजित होने वाली दैनिक वार्ता भी अगले आदेश तक बंद रहेगी। इस निर्णय के पीछे महाराज जी के स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं मुख्य कारण मानी जा रही हैं।


प्रेमानंद महाराज की किडनियों की स्थिति

20 वर्षों से किडनियों में समस्या


प्रेमानंद महाराज ने अपने सत्संग और प्रवचनों में कई बार बताया है कि उनकी दोनों किडनियां पिछले लगभग 20 वर्षों से खराब हैं। वे नियमित रूप से डायलिसिस पर निर्भर हैं। इसीलिए, जब भी उनकी दिनचर्या या पदयात्रा में कोई बदलाव होता है, तो उनके लाखों भक्तों का दिल बैठ जाता है।


मनिंदरजीत सिंह बिट्टा का भावुक प्रस्ताव

अंगदान का प्रस्ताव


इस बीच, सोशल मीडिया पर ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा और महाराज जी के बीच की एक पुरानी बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है। इस मुलाकात में, बिट्टा ने भावुक होकर महाराज जी से अपनी किडनी देने की प्रार्थना की थी। उन्होंने कहा कि वे अपनी स्वस्थ किडनी को महाराज जी को भेंट करना चाहते हैं।


बिट्टा के इस प्रस्ताव को सुनकर प्रेमानंद महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे पूरी तरह से भागवती शक्ति से संपन्न हैं। उन्होंने कहा कि ये किडनियां उन्हें कभी परास्त नहीं कर सकतीं। महाराज जी ने बिट्टा के सेवा भाव की सराहना की, लेकिन अंगदान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।


संत प्रेमानंद महाराज ने अपने दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में यह नियम बनाया है कि वे अपने शरीर में किसी अन्य व्यक्ति का खून नहीं स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से किडनी खराब होने के बावजूद यदि वे इतनी ऊर्जा के साथ बोल पा रहे हैं, तो यह केवल बांके बिहारी जी की कृपा है।