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प्रेमचंद की ‘सोजे वतन’: भारतीयता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक

प्रसिद्ध लेखक डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने ‘सोजे वतन’ की चर्चा करते हुए इसे भारतीयता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया। इस पुस्तक में प्रेमचंद की देशभक्ति और स्वतंत्रता का संदेश छिपा है। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों ने भाग लिया और पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। जानें इस महत्वपूर्ण कृति के बारे में और क्या कहा गया।
 

प्रेमचंद की ‘सोजे वतन’ पर चर्चा

प्रसिद्ध लेखक डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’ ने बताया कि प्रेमचंद की कहानी संग्रह ‘सोजे वतन’ भारतीयता और राष्ट्रीय चेतना की गहरी भावना से भरी हुई है।




वे इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जो प्रेमचंद जयंती के अवसर पर प्रवासी भवन, नई दिल्ली में हुआ।




मणि ने कहा कि प्रेमचंद एक स्वाभाविक देशभक्त थे। ‘सोजे वतन’ में स्वतंत्रता का संदेश छिपा हुआ है। ब्रिटिश शासन ने इस पुस्तक की लगभग 700 प्रतियां जब्त कर ली थीं। प्रतिबंध के बावजूद, क्रांतिकारी इस पुस्तक की बचे हुए संस्करणों को छिपाकर पढ़ते थे ताकि देशभक्ति की भावना को प्रबल किया जा सके। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि प्रगतिशील आलोचकों ने ‘गोदान’, ‘कफन’ और ‘पूस की रात’ को पाठ्यक्रम में शामिल किया, लेकिन ‘सोजे वतन’ को नजरअंदाज किया।




प्रसिद्ध लेखक विनय विक्रम सिंह ने कहा कि ‘सोजे वतन’ प्रेमचंद की प्रारंभिक कहानियों में से एक है, जिसमें राष्ट्र की भावना को प्राथमिकता दी गई है। इसमें भाषाई विविधता भी देखने को मिलती है, जिसमें फारसी, उर्दू और हिंदी का समावेश है। युवा लेखक अविरल अभिलाष ने कहा कि यह पुस्तक भौतिकवादी दृष्टिकोण को चुनौती देती है और राष्ट्रप्रेम को महत्व देती है। यह दर्शाती है कि सच्चा बलिदान ही राष्ट्रप्रेम को प्रखर बनाता है। इस पुस्तक से उठी राष्ट्रवाद की चिंगारी ने देश में क्रांति की लहर पैदा की।




हिन्दी अकादमी, दिल्ली के पूर्व उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने बताया कि ‘सोजे वतन’ की कहानियाँ पारंपरिक प्रेम कहानी से शुरू होकर अंत में देशभक्ति की कहानी में बदल जाती हैं। वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि इस पुस्तक में राष्ट्रप्रेम को जागृत करने पर जोर दिया गया है। इसने मौन क्रांति को जन्म दिया। वरिष्ठ लेखिका शकुंतला मित्तल ने कहा कि ‘सोजे वतन’ की आत्मा त्याग और समर्पण पर आधारित है।




कार्यक्रम का संचालन करते हुए विकास आनंद ने कहा कि 1908 में प्रकाशित ‘सोजे वतन’ एक महत्वपूर्ण कृति है, जो मातृभूमि के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाती है। इस पुस्तक में कुल पांच कहानियाँ शामिल हैं: ‘दुनिया का सबसे अनमोल रतन’, ‘यही मेरा वतन है’, ‘शेख मखमूर’, ‘शोक का पुरस्कार’, और ‘सांसारिक प्रेम और देशप्रेम’।




इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, डॉ. विवेक विश्वास और अभय त्रिपाठी ने भी भाग लिया।