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प्रिया कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में संजय कपूर के तलाक के दस्तावेजों की मांग की

प्रिया कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के तलाक से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं। उनका दावा है कि वह संजय कपूर की कानूनी पत्नी और उत्तराधिकारी हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि संजय कपूर का निधन 2025 में हुआ था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और प्रिया कपूर के अधिकारों के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

प्रिया कपूर ने दावा किया है कि वह दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की कानूनी पत्नी और उनके कानूनी उत्तराधिकारी हैं। इस संबंध में, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संजय कपूर और अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बीच चल रही तलाक की कार्यवाही से संबंधित 2016 की स्थानांतरण याचिका के सभी अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं। अपनी याचिका में, प्रिया कपूर ने कहा कि उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहे उत्तराधिकार मामलों में इन गोपनीय अदालती अभिलेखों की आवश्यकता है, ताकि वह मृतक की संपत्ति से जुड़े अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा कर सकें।


तलाक की प्रक्रिया का इतिहास

याचिका के अनुसार, संजय कपूर ने 2016 में मुंबई के पारिवारिक न्यायालय से दिल्ली में तलाक का मामला स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की थी। इस प्रक्रिया के दौरान, संजय कपूर और करिश्मा कपूर ने आपसी सहमति से अपने विवादों को सुलझा लिया। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने 8 अप्रैल, 2016 को दोनों पक्षों के बीच सहमति की शर्तों को दर्ज करते हुए याचिका का निपटारा किया। प्रिया कपूर ने अदालत को सूचित किया कि संजय कपूर का निधन 12 जून, 2025 को इंग्लैंड में हुआ।


प्रिया कपूर का अधिकार

प्रिया कपूर ने 3 अप्रैल, 2017 को संजय कपूर से विवाह का हवाला देते हुए अपने अधिकारों का दावा किया है। उन्होंने कहा कि वह मृतक की संपत्ति और कानूनी मामलों में सीधे रुचि रखती हैं, इसलिए उन्हें अदालत के रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने का अधिकार है। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री से स्थानांतरण याचिका (सिविल) संख्या 214/2016 की सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई है। चूंकि प्रिया कपूर मूल कार्यवाही में पक्षकार नहीं थीं, उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार औपचारिक आवेदन के माध्यम से अदालत में उपस्थित होने की सलाह दी गई है।